Showing posts from November, 2022

हुजूर (ﷺ) की दुआ की बरकत

एक मर्तबा रसूलुल्लाह (ﷺ) ने हज़रत अली (र.अ) को काज़ी बना कर यमन भेजा, तो हज़रत अली कहने लगे: या रसूलल्लाह! मैं तो एक नौजवान आदमी हूँ मैं उन के दर्मियान फैसला (कैसे) करूँगा? हालाँकि मैं ! तो यह भी नहीं जानता के फैसला क्या चीज है ?

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने मेरे सीने पर अपना हाथ मुबारक मारा और फर्माया : ऐ अल्लाह ! इस के दिल को खोल दे और हक बात वाली जबान बना दे, हजरत अली फरमाते हैं के अल्लाह की कसम ! उस के बाद मुझे कभी भी दो आदमियों के दर्मियान फैसला करने में शक और तरहुद नहीं हुआ।

📕 बैहक़ी फी दलाइलिन्नुबुव्वह : २१३४, अन अली (र.अ)

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मदीना में हुजूर (ﷺ) का इन्तेज़ार

जब मदीना तय्यिबा के लोगों को यह मालूम हुआ के रसूलुल्लाह (ﷺ) मक्का से हिजरत कर के मदीना तशरीफ ला रहे हैं, तो उन की खुशी की इन्तेहा न रही, बच्चे बच्चियाँ अपने छतों पर बैठ कर हुजूर (ﷺ) के आने की खुशी में तराने गाती थीं, रोजाना जवान, बड़े बूढ़े शहर से बाहर निकल कर दोपहर तक आप (ﷺ) की तशरीफ आवरी का इन्तेज़ार करते थे।

एक दिन वह इन्तेज़ार कर के वापस हो ही रहे थे के एक यहूदी की नज़र आप (ﷺ) पर पड़ी तो वह फौरन पुकार उठा "लोगो ! जिन का तुम को शिद्दत से इन्तेज़ार था वह आ गए!” बस फिर क्या था, इस आवाज़ को सुनते ही सारे शहर में खुशी की लहर दौड़ गई और पूरा शहर "अल्लाहु अकबर" के नारों से गूंज उठा और तमाम मुसलमान इस्तिकबाल के लिये निकल आए, अन्सार हर तरफ से जौक़ दर जौक आए और मुहब्बत व अकीदत के साथ सलाम अर्ज करते थे, खुश आमदीद कहते थे। तक़रीबन पांच सौ अन्सारियों ने हुजूर (ﷺ) का इस्तिकबाल किया।

To be Continued ...

📕 इस्लामी तारीख

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आपस में झगड़ा न करो

कुरआन में अल्लाह तआला फ़र्माता है:

“तुम अल्लाह और उस के रसूल की इताअत करो
और आपस में झगड़ा न करो,
वरना तुम बुजदिल हो जाओगे
और दुश्मन के मुकाबले में तुम्हारी हवा उखड़ जाएगी
और (मुसीबत के वक्त) सब्र करो,
बेशक अल्लाह तआला सब्र करने वालों के साथ है।”

📕 सूर-ए-अन्फाल : 46

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पछना के जरिये दर्द का इलाज

हजरत इब्ने अब्बास (र.अ) बयान करते हैं के :

“रसूलुल्लाह (ﷺ) ने एहराम की हालत में दर्द की वजह से सर में पछना लगवाया।”

📕 बुखारी: ५७०१

फायदा: पछना लगाने से बदन से फ़ासिद खून निकल जाता है जिस की वजह से दर्द वगैरह खत्म हो जाता है और आँख की रोशनी तेज़ हो जाती है।

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कयामत के हालात

कुरआन में अल्लाह तआला फ़र्माता है

“जब सूरज बेनूर हो जाएगा और सितारे टूट कर गिर पड़ेंगे और जब पहाड़ चला दिए जाएँगे और जब दस माह की गाभिन ऊँटनियाँ (कीमती होने के बावजूद आजाद) छोड़ दी जाएँगी और जब जंगली जानवर जमा हो जाएँगे और जब दर्या भड़का दिए जाएंगे।”

📕 सूर तकवीर: १-६

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अपने बीवी बच्चों से होशियार रहो

कुरआन में अल्लाह तआला फर्माता है :

"ऐ ईमान वालो ! तुम्हारी बाज़ बीवियाँ और बाज़ औलाद
तुम्हारे हक़ में दुश्मन हैं, तो तुम उन से होशियार रहो।"

वजाहत: बीवी बच्चे बाज़ मर्तबा दुनियावी नफे के लिये
शरीअत के खिलाफ कामों का हुक्म देते हैं,
उन्हीं लोगों को अल्लाह तआला ने दीन का दुश्मन बताया है
और उन के हुक्म को पूरा न करने की हिदायत दी है।

📕 सूरह तग़ाबुन : १४

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मस्जिद में दुनिया की बातें करने का गुनाह

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फर्माया:

“एक जमाना ऐसा आएगा के लोग मस्जिद में हलके लगाकर दुनियावी बातें करेंगे, तुमको चाहिये के उन लोगों के पास बिल्कुल न बैठो, अल्लाह को उन लोगों से कोई वास्ता नहीं।"

📕 मुस्तदरक : ७९१६

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नमाज़ के लिये पैदल आना

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया :

"सब से जियादा नमाज का सवाब उस आदमी को मिलेगा जो सबसे जियादा पैदल चल कर आए फिर उससे जियादा सवाब उस आदमी को मिलेगा जो उस से ज़ियादा दूर से चल कर आए।"

📕 बुखारी : ६५१

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बीमारों की इयादत करना

रसूलुल्लाह (ﷺ) बीमारों की इयादत करते और जनाजे में शरीक होते और गुलामों की दावत कबूल फरमाते थे।

📕 मुस्तदरक लिल हाकिम: ३७३४

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नमाजों को सही पढ़ने पर मगफिरत का वादा

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़र्माया :

"पाँच नमाजें अल्लाह तआला ने फर्ज की हैं, जिस ने उन के लिऐ अच्छी तरह वुजू किया और ठीक वक्त पर उन को पढ़ा और रुकू व सज्दह जैसे करना चाहिये वैस हो किया, तो ऐसे शख्स के लिये अल्लाह तआला का पक्का वादा है, के वह उसको बख्श देगा। और जिस ने ऐसा नहीं किया तो लिए अल्लाह तआला का कोई वादा नहीं, चाहेगा तो उसको बख्श देगा और चाहेगा तो सजा देगा।"

📕 अबू दाऊद: ४२५

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साँस लेने का निज़ाम, बलग़म के फायदे

जब हम गर्द व गुबार वाली हवा में साँस लेते हैं तो मिट्टी के ज़र्रात भी उस में शामिल हो जाते हैं। जिनसे हिफाजत के लिये अल्लाह तआला ने नाक से फेफड़े तक हवा के रास्ते में बलगम पैदा कर दिया है जो हवा की नालियों को तर (गिला) रखता है, जब हवा उन नालियों से गुज़रती है तो उस में मौजूद गर्द व गुबार बलग़म से चिपक जाते हैं और साफ सुथरी हवा फेफड़े में पहुँच जाती है, फिर बलगम के जरिये यह गर्द व गुबार साँस की नालियों के बाहर आ जाता है। सुबहानल्लाह !

अल्लाह ने अपनी कुदरत से हमारे फेफड़े की हिफाज़त का कैसा गैबी इन्तेजाम फ़रमाया है।

📕 अल्लाह की कुदरत

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ग़ारे सौर से हुजूर (ﷺ) की रवानगी

रसूलुल्लाह (ﷺ) हिजरत के दौरान गारे सौर में जुमा, सनीचर और इतवार तीन दिन रहे, फिर जब मक्का में शोर व हंगामे में कमी हुई तो मदीना के लिये निकलने का इरादा फ़रमाया, अब्दुल्लाह बिन अरीक़त को रास्ते की रहनुमाई में बहुत महारत थी, उन्हें हज़रत अबू बक्र (र.अ.) ने दो सवारी देकर मदीना पहुँचाने के लिये उजरत पर पहले ही से तय्यार कर रखा था, जब अब्दुल्लाह बिन अरीक़त सवारियाँ ले कर आया, तो आप (ﷺ) की खिदमत में पेश किया, चुनान्चे आपने एक ऊँटनी क़ीमतन पसन्द किया।

इस तरह हुजूर (ﷺ) , हज़रत अबू बक्र, आमिर बिन फुहरा और अब्दुल्लाह बिन अरीकत मदीना की तरफ निकल पड़े। इन हज़रात ने आम रास्ते को छोड़ कर साहिली रास्ता इख्तियार किया, इसी सफर में आप (ﷺ) का गुजर उम्मे माबद के खेमे से हुआ, तो आप ने उम्मे माबद की इजाजत से उन की खुश्क थनों वाली और कमजोर बकरी से दूध दूहा, सब ने सैर हो कर पिया, फिर दूध दूह कर उम्मे माबद को दे कर सफर का रुख किया।

कुफ्फार ने एलान किया था के जो मुहम्मद (ﷺ) को गिरफ्तार कर के लाएगा, उस को इनाम में सौ ऊँट दिए जाएँगे। चुनान्चे सुराक़ा बिन मालिक ने ऊँटों की लालच में घोड़े पर सवार हो कर पीछा किया। जब क़रीब पहुँचा तो आप (ﷺ) ने दुआ फर्माई, जिसकी वजह से उस के घोड़े के अगले दोनों पैर घुटनों तक जमीन में फँस गए। वह माफी माँगने लगा और वादा किया के अगर नजात मिली, तो कुफ्फार को आपका पीछा करने से रोक दूंगा, फिर आप (ﷺ) ने दुआ फ़र्माई तो उस को नजात मिली।

To be Continued ...

📕 इस्लामी तारीख

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हौजे कौसर की कैफियत

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़र्माया :

“हौज़े कौसर के बर्तन सितारों के बराबर होंगे, उस से जो भी इन्सान एक घूंट पी लेगा तो हमेशा के लिए उसकी प्यास बुझ जाएगी।”

📕 इब्ने माजा: ४३०३

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लोगों के लिये वही चीज पसंद करो जो तुम अपने लिये पसंद करते हो

रसूलअल्लाह (ﷺ) ने फर्माया :

"तक़वा व परहेजगारी इख्तियार करो, सब से बड़े इबादत गुजार बन जाओगे
और थोड़ी चीज पर रजामन्द हो जाओ सब से बड़े शुक्रगुज़ार बन जाओगे
और लोगों के लिये वही चीज पसंद करो जो तुम अपने लिये पसंद करते हो,
तुम (सच्चे) मोमिन बन जाओगे
और तुम अपने पड़ोसी के साथ हुस्ने सुलूक करो (पक्के) मुसलमान बन जाओगे
और कम हँसा करो, क्योंकि ज्यादा हँसने से दिल मुर्दा हो जाता है।"

📕 इब्ने माजा : ४२१७

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मौत की सख्ती के वक़्त की दुआ

हजरत आयशा (र.अ) फर्माती हैं के,
रसूलअल्लाह (ﷺ) ने मौत से पहले यह दुआ पढ़ी थी :

तर्जमा: ऐ अल्लाह! मौत की सख्तियों और बेहोशियों पर मेरी मदद फ़र्मा।

📕 तिर्मिजी : ९७८

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कुफ्र की सज़ा जहन्नम है

कुरआन में अल्लाह तआला फ़र्माता है:

“जो लोग कुफ्र करते हैं तो अल्लाह तआला के मुकाबले में उन का माल और उन की औलाद कुछ काम नहीं आएगी और ऐसे लोग ही जहन्नम का इंधन होंगे।”

📕 सूरह आले इमरान : १०

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वुजू कर के इमाम के साथ नमाज अदा करने की फ़ज़ीलत

रसुलल्लाह (ﷺ) ने फर्माया :

"जिस ने अच्छी तरह मुकम्मल वुजू किया, फिर फर्ज नमाज अदा करने के लिये गया और इमाम के साथ नमाज पढी, उसके (सगीरा गुनाह) माफ कर दिये जाते हैं।"

📕 इब्ने खुजैमा १४०९

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आखिरत दुनिया से बेहतर है

कुरआन में अल्लाह तआला फ़र्माता है:

“तुम दुनियावी जिंदगी को मुकद्दम रखते हो, हालांके ! आखिरत दुनिया से बेहतर है और बाकी रहने वाली है (इसलिए आखिरत ही की तय्यारी करो)।”

📕 सूरह आला : १६ ता १७

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बीवी की विरासत में शौहर का हिस्सा

कुरआन में अल्लाह ताआला फ़र्माता है :

“तुम्हारे लिए तुम्हारी बीवियों के छोड़े हुए माल में से आधा हिस्सा है, जब के उन को कोई औलाद न हो और अगर उन की औलाद हो, तो तुम्हारी बीवियो के छोड़े हुए माल में चौथाई हिस्सा है (तुम्हें यह हिस्सा) उन की वसिय्यत और कर्ज अदा करने के बाद मिलेगा।”

📕 सूरह निसा १२

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ऊंटों के मुतअल्लिक़ खबर देना

गज़व-ए-बनू मुस्तलिक में हज़रत जुवैरिया (र.अ) को मुसलमानों ने कैद कर लिया था, तो उन के वालिद आप (ﷺ) की खिदमत में बतौर फिदया के ऊंट लेकर हाज़िर हुए, लेकिन उनमें से दो ऊंटों को वादि-ए-अक़ीक़ में एक तरफ बाँध दिया था और आकर कहा : मेरी बेटी को मेरे हवाले कर दीजिये और उसके फिदये में यह ऊँट हाज़िर हैं।

आप (ﷺ) ने फर्माया : वह दो ऊँट कब लाओगे जो तुम को ज़्यादा पसंद हैं और जिन को बाँध कर आए हो? वालिद ने कहा : मैं गवाही देता हूँ के आप अल्लाह के रसूल (ﷺ) हैं, यह राज तो मेरे अलावा कोई नहीं जानता था और फिर वो ईमान ले आये।

📕 तारीखे दिमश्क लिइब्ने असाकिर : २१७/३

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हुजूर (ﷺ) ग़ारे सौर में

रसूलअल्लाह (ﷺ) और हज़रत अबू बक्र (र.अ) दोनों मक्का छोड़ कर गारे सौर में पहुँच चुके थे। उधर मुश्रिकीनने पीछा करना शुरू किया और तलाश करते हुए गारे सौर के बिल्कुल मुँह के करीब पहुंच गए।

उस वक़्त हजरत अबू बक्र (र.अ) ने कहा : या रसूलल्लाह ! उन में से किसी ने एक क़दम भी आगे बढ़ाया, तो हमें देख लेगा।

हुजूर (ﷺ) ने फर्माया “घबराओ नहीं अल्लाह हमारे साथ है।” अल्लाह तआला ने दोनों हज़रात की अपनी कुदरत से हिफाज़त फ़रमाई। और वह लोग वापस हो गए। हजरत अबू बक्र (र.अ) ने अपने बेटे अब्दुल्लाह से यह कह दिया था के वह मुशरिकों के दर्मियान होने वाली बातें रात के वक़्त आकर बता दिया करें।

चुनान्चे वह रात के वक्त गार में आकर मुश्रिकों की साजिशों की इत्तेला हुजूर (ﷺ) को दे देते थे और हज़रत अस्मा बिन्ते अबू बक्र (र.अ) खाना वगैरह पहुँचाया करती थीं। इस तरह तीन दिन यहाँ गुज़रे फिर मदीना की तरफ रवानगी हुई।

📕 इस्लामी तारीख

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अमानत वालों को अमानतें वापस कर दिया करो

कुरआन में अल्लाह तआला फ़र्माता है:

“अल्लाह तआला तुमको हुक्म देता है के
अमानत वालों को उनकी अमानतें वापस कर दिया करो।”

📕 सूर: निसा: ५८

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जन्नतियों का लिबास

कुरआन में अल्लाह तआला फ़र्माता है:

"उन जन्नतियों के बदन पर बारीक और मोटे रेशम के कपड़े होंगे और उनको चाँदी के कंगन पहनाए जाएँगे और उनका रब उनको पाकीज़ा शराब पिलाएगा।
(अहले जन्नत से कहा जाएगा के) यह सब नेअमतें तुम्हारे आमाल का बदला हैं और तुम्हारी दुनियावी कोशिश कबूल हो गई।"

📕 सूरह दहर : २१ ता २२

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दुनिया से बेरग़वती का इनाम

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फरमाया:

"जो शख्स जन्नत का ख्वाहिश मन्द होगा वह भलाई में जल्दी करेगा।
और जो शख्स जहन्नम से खौफ करेगा, वह ख्वाहिशात से गाफिल (बेपरवाह) हो जाएगा
और जो मौत का इंतज़ार करेगा उसपर लज्जतें बेकार हो जाएगी
और जो शख्स दुनिया में जुद (दुनिया से बेरगबती) इख्तियार करेगा,
उस पर मुसीबतें आसान हो जाएँगी।"

📕 शोअबुल ईमान: १०२१९

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इशा के बाद जल्दी सोने की सुन्नत

रसूलुल्लाह (ﷺ) इशा से पहले नहीं सोते थे
और इशा के बाद नहीं जागते थे (बल्के सो जाते थे)

📕 मुस्नदे अहमद : २५७४८

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इजार या पैन्ट टखने से नीचे पहनने का गुनाह

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया :

"जो शख्स तकब्बुर के तौर पर अपने इज़ार को टखने से नीचे लटकाएगा, अल्लाह तआला क़यामत के दिन उसकी तरफ रहमत की नजर से नहीं देखेगा।"

📕 बुखारी: ५७८८

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जमात के लिये मस्जिद जाने की फ़ज़ीलत

रसूलल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया:

"जो शख्स बाजमात नमाज के लिये मस्जिद में जाए तो आते जाते हर कदम पर एक गुनाह मिटता है (हर कदम पर) और उसके लिये एक नेकी लिखी जाती है।"

📕 मुस्नदे अहमद : ६५६३

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दाढ़ के दर्द का इलाज

एक मर्तबा हजरत अब्दुल्लाह बिन रवाहा (र.अ) ने हुजूर (ﷺ) से दाढ में शदीद दर्द की शिकायत की, तो आप (ﷺ) ने उन्हें करीब बुला कर दर्द की जगह अपना मुबारक हाथ रखा और सात मर्तबा यह दुआ फ़रमाई :

चुनान्चे फ़ौरन आराम हो गया।

📕 दलाइलुन्नबह लिल बैहकी: २४३१

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सूद से बचना

कुरआन में अल्लाह तआला फ़र्माता है:

"ऐ ईमान वालो! तुम कई गुना बढ़ा कर सूद मत खाया करो (क्योंकि सूद लेना मुतलकन हराम है) और अल्लाह तआला से डरते रहो ताके तुम कामयाब हो जाओ।"

📕 सूरह आले इमरान: १३०

नोट: कम या जियादा सुद लेना देना, खाना, खिलाना नाजाइज और हराम है,
कुरआन और हदीस में इस पर बडी सख्त सजा आई है,
लिहाजा हर मुसलमान पर सुदी लेन देन से बचना जरूरी है।'

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गिजा और साँस की नालियाँ

अल्लाह तआला ने हमारे साँस लेने और खाने पीने की दो मुख्तलिफ नालियाँ बनाई हैं। खाने की नाली का ताल्लुक मेदे से है और साँस की नाली का ताल्लुक फेफड़े से है। जब इन्सान खाता है या पीता है, तो कुदरती तौर पर साँस की नाली का मुँह ढक्कन की तरह परदे से बंद हो जाता है और खाने की नाली के जरिये खाना मेदे में पहुँच जाता है।

यही खाना अगर हवा की नाली में दाखिल होकर फेफड़ों में पहुँच जाता, तो इंसान का जिंदा रहना मुश्किल हो जाता।

मगर अल्लाह तआला की कुदरत पर कुर्बान जाइये के दोनों नालियों के करीब होने के बावजूद साँस लेने और खाने पीने का हैरान कुन इंतजाम फ़र्मा दिया है।

📕 अल्लाह की कुदरत

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हुजूर (ﷺ) की हिजरत

रसूलअल्लाह (ﷺ) को जब अल्लाह ताला के हुक्म से हिजरत की इजाजत मिली, तो उसकी इत्तेला हजरत अबू बक्र सिद्दीक (र.अ) को दे दी, और जब हिजरत का वक्त आया, तो रात के वक्त घर से निकले और काबा पर अलविदाई नज़र डालकर फ़र्माया : तू मुझे तमाम दुनिया से ज़ियादा महबूब है। अगर मेरी क़ौम यहाँ से न निकालती तो मै तेरे सिवा किसी और जगह को रहने के लिये इख्तियार न करता।

हजरत असमा बिन्ते अबू बक्र (र.अ) ने दो तीन रोज़ के खाने पीने का सामान तय्यार किया। आप (ﷺ) हज़रत अबू बक्र (र.अ) के साथ मक्का से रवाना हुए। एक तरफ महबूब वतन छोड़ने का गम था और दूसरी तरफ नुकीले पत्थरों के दुश्वार गुजार रास्ते और हर तरफ से दुश्मनों का खौफ था। मगर इस्लाम की खातिर इमामुल अम्बिया तमाम मुसीबतों को झेलते हुए आगे बढ़ रहे थे।

रास्ते में हज़रत अबू बक्र (र.अ) कभी आगे आगे चलते और कभी पीछे पीछे चलने लगते थे। हुजूर (ﷺ) ने इस की वजह पूछी, तो उन्होंने फ़रमाया : या रसूलल्लाह (ﷺ) जब मुझे पीछे से किसी के आने का खयाल होता है, तो मैं आप के पीछे चलने लगता हूँ और जब आगे किसी के घात में रहने का खतरा होता है, तो आगे चलने लगता हूँ। चूँकि कुफ्फार की मुखालफत का जोर था और वह लोग (नऊजु बिल्लाह) आप (ﷺ) के कत्ल की कोशिश में थे। इस लिये रास्ते में आप (ﷺ) और हज़रत अबू बक्र (र.अ) ने "गारे सौर" में पनाह ली, उस गार में पहले हजरत अबू बक्र (र.अ) दाखिल हुए और उसको साफ किया, फिर हुजूर (ﷺ) उस में दाखिल हुए और तीन रोज तक उसी ग़ार में रहे।

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📕 इस्लामी तारीख

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किसी की मुसीबत पर खुशी का इजहार मत करो

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फर्माया :

"तम अपने किसी भाई की मुसीबत पर खुशी का इजहार मत करो। (अगर एसा करोगे तो हो सकता है के) अल्लाह तआला उसको उस मुसीबत से नजात दे दे और तुम को उस मुसीबत में मुब्तला कर दे।"

📕 तिर्मिजी: २५०६

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वरम (सूजन) का इलाज

हज़रत अस्मा (र.अ) के चेहरे और सर में वरम (सूजन) हो गया,

तो उन्होंने हजरत आयशा (र.अ) के जरिये आप (ﷺ) को इस की खबर दी। चुनान्चे हुजूर (ﷺ) उन के यहाँ तशरीफ़ ले गए और दर्द की जगह पर कपड़े के ऊपर से हाथ रख कर तीन मर्तबा यह दुआ फ़रमाई।

फिर इर्शाद फ़र्माया : यह कह लिया करो, चुनांचे उन्हों ने तीन दिन तक यही अमल किया तो उन का वरम जाता रहा।

📕 दलाइलुनबुवह लिल बैहकी: २४३०

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हौज़े कौसर क्या है ?

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया :

"कौसर जन्नत में एक नहर है, जिस के दोनों किनारे सोने के हैं और वह मोती और याकूत पर बहती है, उस की मिट्टी मुश्क से जियादा खुशबूदार, उस का पानी शहेद से जियादा मीठा और बर्फ से जियादा सफेद है।"

📕 तिर्मिज़ी : ३३६१

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लोगों की कंजूसी

कुरआन में अल्लाह तआला फ़र्माता है :

"सुन लो! तुम ऐसे हो के जब तुम को अल्लाह की राह में खर्च करने के लिये बुलाया जाता है,
तो तुम में से बाज लोग बुख्ल करते हैं
और जो कंजूसी करता है, तो हकीकत में अपने ही लिये कंजूसी करता है
और अल्लाह तआला ग़नी है (किसी का मोहताज नहीं)

और तुम सब उस के मोहताज हो।"

📕 सूरह मुहम्मद : ३८

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काफ़िर नाकाम होंगे

कुरआन में अल्लाह तआला फ़र्माता है :

"बेशक जो लोग काफिर हो गए और (दूसरों को भी) अल्लाह के रास्ते से रोका और हिदायत ज़ाहिर होने के बाद अल्लाह के रसूल की मुखालफत की, तो यह लोग अल्लाह (के दीन) को ज़रा भी नुकसान नहीं पहुंचा सकेंगे और अल्लाह तआला उन के तमाम आमाल को बरबाद कर देगा।"

📕 सूरह मुहम्मद : ३२

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घर से वुजू कर के मस्जिद जाने का सवाब

रसूलअल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया :

"जब तुम में से कोई घर से वुजू कर के मस्जिद आए, तो घर लौटने तक उसे नमाज का सवाब मिलता रहेगा।"

📕 मुस्तदरक : ७४४

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बच्चों को यह दुआ पढ़ कर दम करें

रसूलुल्लाह (ﷺ) हजरत हसन व हुसैन (र.अ) को यह दुआ पढ कर दम किया करते थे :

أَعُوذُ بِكَلِمَاتِ اللَّهِ التَّامَّةِ مِنْ كُلِّ شَيْطَانٍ وَهَامَّةٍ وَمِنْ كُلِّ عَيْنٍ لامَّةٍ

आऊज़ु बिकालिमातिल्लाहीत ताम्माह
वा मीन कुल्ली शयतानीव वा हाम्माह
वा मीन कुल्ली अयनील आम्माह

तर्जमा: मैं पनाह माँगता हूँ अल्लाह की पूरे पूरे कलिमात के ज़रिए, हर शैतान से और हर ज़हरीले जानवर से और हर नुकसान पहुँचने वाली बुरी नज़र से।

📕 सही बुखारी: 3371

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बकरी का दूध देना

हज़रत अब्दुल्लाह बिन मसऊद (र.अ) फरमाते हैं के मैं मकामे जियाद में उकबा बिन अबी मुईत की बकरियाँ चरा रहा था, इतने में मुहम्मद (ﷺ) और हजरत अबू बक्र (र.अ) हिजरत करते हुए मेरे पास पहुँचे और कहने लगे: तुम हम को दूध पिला सकते हो?

मैंने कहा: यह बकरियाँ मेरे पास अमानत हैं मैं इन का दूध कैसे पिला सकता हूँ? तो फर्माया: अच्छा ठीक है इतना तो करो के जिस बकरीने अभी तक बच्चा नहीं जना उसको ले आओ, तो मैंने ऐसी बकरी हाज़िर कर दी।

आप (ﷺ) ने उसके थनों पर जैसे ही हाथ फेरा थनों में दूध भर आया फिर उसको एक प्याले में दूहा, उस में से आप (ﷺ) ने पिया फिर हज़रत अबू बक्र (र.अ) को और फिर मुझ को पिलाया और थनों से कहा सुकड़ जाओ तो वह थन अपनी पहली हालत पर लौट आए।

📕 तबरानी कबीर: ८३७४, अन इब्ने मसऊद (र.अ)

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नबी (ﷺ) को शहीद करने की नाकाम साजिश

कुरैश को जब मालूम हुआ के मोहम्मद (ﷺ) भी हिजरत करने वाले हैं, तो उन को बड़ी फिक्र हुई के अगर मोहम्मद (ﷺ) भी मदीना चले गए, तो इस्लाम जड़ पकड़ जाएगा और फिर वह अपने साथियों के साथ मिल कर हम से बदला लेंगे और हमें हलाक कर देंगे। इस बिना पर उन्होंने कुसइ बिन किलाब के घर, जो दारुन नदवा के नाम से मशहूर था, साजिश के लिये जमा हुए, उस में हर कबीले के सरदार मौजूद थे।

सभी ने आपस में यह तय किया, के हर कबीले का एक एक शख्स जमा हो और सब मिल कर तलवारों से हुजूर (ﷺ) का खातमा करदें (नऊजु बिल्लाह). इस फैसले के बाद उन्होंने रात के वक़्त रसूलुल्लाह (ﷺ) के मकान को घेर लिया और इस इन्तेजार में रहे के जब मोहम्मद (ﷺ) सुबह को नमाज़ के लिये निकलेंगे, तो तलवारों से उनका खात्मा कर देंगे।

मगर अल्लाह तआला ने रसूलुल्लाह (ﷺ) को कुरैश की इस साजिश से बाखबर कर दिया, इसी लिये आप रात को अपने बिस्तर पर हजरत अली (र.अ) को लिटा कर सूर-ए-यासीन पढ़ते हुए और उन के सरों पर मिट्टी डालते हुए उन के सामने से गुजर गए और अल्लाह तआला ने उन की आँखों पर परदा डाल दिया, उन लोगों को कुछ भी खबर न हुई। सुबह को जब उन्होंने हज़रत अली (र.अ) को बाहर निकलते देखा तो बहुत शर्मिंदा हुए।

📕 इस्लामी तारीख

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अल्लाह के हुक्म पर चलो ताकि तुम टेढ़े रास्ते से बच सको

कुरान में अल्लाह तआला फरमाता है:

“ये बताये हुए अहकाम ही मेरा सीधा रास्ता है, तुम इसी पर चलो और दूसरे गलत रास्तों पर मत चलो वरना वो रास्ते तुमको राहे खुदा से हटा देंगे, अल्लाह तआला इस बात का तुमको ताकीद के साथ हुक्म देता है ताकि तुम टेढ़े रास्ते से बच सको।”

📕 सूरह अनम: 153

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नज़रे बद का इलाज

नज़रे बद की दुआ

أَعُوذُ بِكَلِمَاتِ اللَّهِ التَّامَّةِ مِنْ كُلِّ شَيْطَانٍ وَهَامَّةٍ وَمِنْ كُلِّ عَيْنٍ لامَّةٍ

अ-ऊज़ू बिकलिमा तिल्लाहित ताम्मति मिनकुल्लि शैतानिन
व हाममतिन व मिनकुल्लि ऐनिन लाममतिन।

तर्जुमा : मैं पनाह मांगता हु अल्लाह की पुरे पुरे कलिमात के जरिए, हर शैतान से और हर ज़हरीले जानवर से और हर नुकसान पहुँचाने वाली नज़र-ए-बद्द से।

📕 सहीह बुखारी 3371


एक शख्स को नजर लग गई, तो रसूलुल्लाह (ﷺ) ने उसके सीने पर हाथ मार कर यह दुआ फरमाई:

तर्जुमा : ऐ अल्लाह ! इस की गर्मी, इस की ठंडक और तकलीफ को दूर कर दे। चुनान्चे वह शख्स (ठीक हो कर) खड़ा हो गया।

📕 मुस्नदे अहमद : १५२७३
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आखिरत की कामयाबी दुनिया से बेहतर है

अल्लाह तआला कुरआन में फरमाता है :

"तुम लोगों को जो कुछ दिया गया है वह सिर्फ दुनियावी जिन्दगी में (इस्तेमाल की) चीजें हैं और जो कुछ (अज्र व सवाब) अल्लाह के पास है, वह इस (दुनिया) से कहीं बेहतर और बाकी रहने वाला है और वह उन लोगों के लिये है जो ईमान लाए और अपने रब पर भरोसा रखते हैं।”

📕 सूर-ए-शूराः ३६

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अनकरीब दुनिया खोल दी जाएगी

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फर्माया :

“अनकरीब दुनिया की दौलत तुम पर खोल दी जाएगी, यहाँ तक के तुम अपने घरों को इस तरह आरास्ता करोगे जैसे काबा शरीफ़ को आरास्ता किया जाता है।”

📕 तिबरानी कबीर : ४०३५

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तहज्जुद की फ़ज़ीलत

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया :

”जब कोई आदमी रात को अपनी बीवी को बेदार करता है और अगर उस पर नींद का ग़लबा हो, तो उसके चेहरे पर पानी छिडक कर उठाता है और फिर दोनों अपने घर में खड़े होकर रात का कुछ हिस्सा अल्लाह की याद में गुज़रते हैं तो उन दोनों की मग़फिरत कर दी जाती है।”

📕 तबरानी कबीर:3370, अन अबी मालिक (र.अ)

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दिखावे के लिए कपड़ा पहनने का गुनाह

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया :

“जो शख्स शोहरत के लिए दुनिया में कपड़े पहनेगा, अल्लाह तआला उसको कयामत के दिन रुसवाई के कपड़े पहनाएगा और फिर उसमें आग भड़काएगा।”

📕 इब्ने माजाह, ३६०८

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तीन उंगलियों से खाना

हजरत कअब बिन मालिक (र.अ) फरमाते हैं :

रसूलुल्लाह (ﷺ) तीन उंगलियों से खाते थे
और जब खाने से फारिग हो जाते तो उंगलियाँ चाट लेते थे।

📕 मुस्लिम: ५२९८

नोट: खाने के बाद उंगलियों को चाटना सुन्नत है,
लेकिन इस तरह नहीं चाटना चाहिये के देखने वाले को नागवार हो।

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माँगी हुई चीज़ का लौटाना

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया :

"(वापसी की शर्त पर) माँगी हुई चीज़ को वापस किया जाएगा।"

📕 इब्ने माजा : २३९८

खुलासा : अगर किसी शख्स ने कोई सामान यह कह कर माँगा के वापस कर दूंगा, तो उस का मुक़र्रर वक्त पर लौटाना वाजिब है, उसको अपने पास रख लेना और बहाना बनाना जाइज नही है।

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