घर में नफील नमाज़ पढ़ने की फ़ज़ीलत


घर में नफील नमाज़ पढ़ने की फ़ज़ीलत



रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फर्माया : 





"जब तुम में से कोई मस्जिद में (फ़र्ज़) नमाज़ अदा कर ले, तो अपनी नमाज़ में से कुछ हिस्सा घर के लिए भी छोड़ दे; क्योंकि अल्लाह तआला बन्दे की (नफ़्ल) नमाज़ की वजह से उस के घर में खैर नाज़िल करता हैं।"





📕 सही मुस्लिम : ७७८, अन जाबिर (र.अ)










एक और रिवायत में, रसूलअल्लाह(ﷺ) ने फरमाया –





“फ़र्ज़ नमाज़ के अलावा (सुन्नत और नवाफ़िल नमाज़े) घर में पढ़ना मेरी इस मस्जिद (मस्जिद-ए-नबवी) में नमाज़ पढ़ने से भी अफ़ज़ल है।”





📕 सुनन अबू दाऊद: 1044, जैद इब्ने थाबित (र.अ.)





नोट : ख्याल रहे के फ़र्ज़ नमाज़े मस्जिद में ही पढ़ना अफ़ज़ल और इन्तेहाई जरुरी है।



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Mohammad Salim

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