सुलतान सलाहुद्दीन अय्यूबी (रह.) | Salahuddin Ayyubi (R.h)

सुलतान सलाहुद्दीन अय्यूबी (रह.) | Salahuddin Ayyubi (R.h)

Salahuddin Ayyubi (R.h)

सुलतान सलाहुद्दीन अय्यूबी (रह.) जिन्हें “फ़ातिहे बैतुल मुकद्दस” कहा जाता है, छटी सदी हिजरी के बड़े ही नामवर और कामयाब बादशाह गुज़रे हैं। वालिद की तरफ़ निसबत करते हुए उन्हें “अय्यूबी” कहा जाता है।

उन की परवरिश एक दर्मियानी दर्जे के शरीफ़ ज़ादा खानदान में सिपाही की हैसियत से हुई। बादशाह बनने के बाद उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी बड़े ही मुजाहदे और सब्र के साथ गुज़ारी।

उन्होंने अपनी जिंदगी का मक्सद सिर्फ एक ही बना लिया था के दुनिया में अल्लाह का नाम कैसे बुलंद हो।

उन के कारनामों में सब से बड़ा कारनामा यह है के उन्होंने किबल-ए-अव्वल यानी बैतुल मुक़द्दस को आज़ाद कराया, जो तकरीबन नब्बे साल से इसाइयों के कब्जे में था।

यह वही किबल-ए-अव्वल है, जहाँ हुजूर (ﷺ) ने अम्बियाए किराम की इमामत की थी और फिर वहाँ से आसमान का सफ़र (मेराज) किया था।

इसाइयों ने जब बैतुल मुकद्दस पर कब्ज़ा किया था, तो मुसलमानों पर जुल्म व सितम की इन्तिहा कर दी थी, मगर उसी बैतुल मुकद्दस पर नब्बे साल के बाद जब मुसलमानों का दोबारा कब्ज़ा हुआ, तो सुलतान सलाहुद्दीन अय्यूबी (रह.) ने उन से बदला लेने के बजाए यह एलान करा दिया के जो बूढ़े आदमी फिदिया की रकम नहीं दे सकते, वह आज़ाद किए जाते हैं के वह जहाँ चाहें चले जाएँ।

उसके बाद सुब्ह से शाम तक वह लोग अमन के साथ शहर से निकलते रहे। इसके साथ साथ उनको बैतुल मुकद्दस की ज़ियारत की भी आम इजाज़त दे दी। सुलतान सलाहुद्दीन (रह.) का यह वह एहसान व करम था जिस को ईसाई दुनिया आज भी नहीं भुला सकती है।

📕 इस्लामी तारीख

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Mohammad Salim

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