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Islamic Quotes in Hindi | पैगम्बर हजरत मुहम्मद साहब (ﷺ) की शिक्षाओं की एक झलक

Islamic Quotes in Hindi

अल्लाह के आखरी पैगंबर मुहम्मद साहब (ﷺ) की शिक्षाओं की एक झलक हिंदी में।

संसार के विषय में | Best Islamic Quotes 1-10

1. समस्त संसार को बनाने वाला एक ही मालिक अल्लाह हैं। वह निहायत मेहरबान और रहम करने वाला है। उसी की ईबादत (पूजा) करो और उसी का हुक्म मानो।

2. मैं अल्लाह की ओर से संसार का मार्ग दर्शक नियुक्त किया गया हूॅ। मार्ग दर्शन का कोई बदला तुमसे नही चाहता। मेरी बातें सुनों और मेरी आज्ञा का पालन करो।

3. अल्लाह ने इन्सान पर अनगिनत उपकार किए हैं। धरती और आकाश की सारी शक्तियॉ इन्सानों की सेवा मे लगा दी हैं। वही धरती और आकाश का मालिक हैं, वही तुम्हारा पालनहार हैं।

4. मै कोई निराला और अजनबी पैगम्बर नही हूॅं। मुझसे पहले संसार मे मार्ग दर्शन के लिए बहुत-से रसूल आ चुके हैं, अपने धर्म-ग्रन्थों में देख लो या किसी ज्ञानी व्यक्ति से मालूम कर लो। मैं पहले के पैगम्बर की शिक्षा को पुन: स्थापित करने और कपटाचारियों के बन्धन से मानव को मुक्त कराने आया हू।

5. अल्लाह (यानि अपने सच्चे मालिक ) को छोड़कर अन्य की पूजा करना सबसे बड़ा पाप और अत्याचार है।

6. अल्लाह की नाफरमानी करके तुम उसका कुछ बिगाड़ नहीं सकते। फरमाबरदार बनकर रहो, इसमें तुम्हारा अपना ही भला है।

7. अल्लाह की याद से रूह को सकून मिलता हैं, उसकी इबादत से मन का मैल दूर होता है।

8. अल्लाह की निशानियों ( दिन, रात, धरती, आकाश, पेड़-पौधे, जीव-जन्तु आदि की बनावट ) पर विचार करो। इस से अल्लाह पर ईमान मजबूत होगा और भटकने से बच जाओगे।

9. मैं इसलिए भेजा गया हू कि नैतिकता और उत्तम आचार को अंतिम शिखर तक पहुॅचा दू। मैं लोगो की कमर पकड़-पकड़कर आग में गिरने से बचा रहा हू, किन्तु लोग हैं कि आग ही की ओर लपक रहे हैं।

10. मैं दुनियावालों के लिए रहमत बनाकर भेजा गया हूॅ। तुम लोगो के लिए आसानियॉ पैदा करो; मुसीबते न पैदा करो। मॉ-बाप की सेवा करो। उनके सामने ऊॅची आवाज से न बोलो। उन्होने तुम पर बड़ा उपकार किया है, अत: तुम उनके आज्ञाकारी बनकर रहों।

न्याय अन्याय के विषय में | Best Islamic Quotes 11-25

11. मॉ-बाप यदि अन्याय का आदेश दे तो न मानों, बाकी बातों में उनकी आज्ञा का पालन करो।

12. सारे मानव एक मालिक(अल्लाह) के पैदा किए हुए है, एक मॉ-बाप ( आदम-हव्वा ) की संतान हैं। उनके बीच रंग-नस्ल जाति, भाषा, क्षेत्रीयता आदि का भेद भाव घोर अन्याय है। सारे लोग आदम की सन्तान है, उनसे प्यार करो घृणा न करो। उन्हे आशावान बनाओं निराश मत करो।

13. सत्य और न्याय की गवाही दो, चाहे तुम्हारी अपनी या अपने परिवार-जनों की ही हानि क्यो न हो। अन्याय के विरूद्ध संघर्ष करने वाला अल्लाह का प्यारा होता है।

मनुष्य के श्रेष्ठ आचरण के विषय में | Best Islamic Quotes 11-25

14. मानव में श्रेष्ठ वह हैं जो दूसरों का हमदर्द, पवित्र आचरण वाला और अपने पालनहार ( अल्लाह ) का आज्ञाकारी हैं।

15. आखिरत ( परलोक ) की यातना बड़ी कठोर हैं। वहॉ कुल-वंश, सगे-सम्बन्धी, धन-दौलत और किसी की सिफारिश कुछ काम आने वाली नहीं। अल्लाह के हुक्म का पालन और उत्तम आचरण ही (उस की यातना से) बचने का एक मात्र साधन हैं। अपने को और अपने घर वालों को नरक की अग्नि से बचाओं।

16. तुम धरती वालों पर दया करो, आकाशवाला ( अल्लाह ) तुम पर दया करेगा।

17. वह व्यक्ति सब से अच्छा हैं जो अपने घरवालों और पड़ोसियों के लिए अच्छा हैं।

18. औरतों, गुलामों और यतीमों ( अनाथों ) पर विशेष रूप से दया करो।

19. जो अपने बेटे और बेटियो के बीच भेदभाव न करे और बेटियों का ठीक से पालन-पोषण करे, वह स्वर्ग में जाएगा।

20. जो बड़ो का आदर और छोटो से प्रेम न करे वह हम में से नहीं।

21. तुम ￰दुनयावी जिन्दगी मे मस्त होकर भूल मत जाओ, तुम सब को अपने किए हुए कर्मो का हिसाब अपने रब को देना हैं। आखिरत ( परलोक ) की सफलता ही वास्तविक सफलता हैं।

22. अल्लाह के हुक्म के मुताबिक खर्च करके स्वंय को नरक की अग्नि से बचाओं। तुम्हारे माल में तुम्हारे सम्बन्धियों, गरीबो, अनाथो का भी हक हैं। उन के हक अदा करो।

23. दूसरो का धन अवैध रूप से न खाओं। तिजारत या समझौते के द्वारा वैध रूप से धन प्राप्त करो। चीजों मे मिलावट न करो, नाप-तौल मे कमी न करो। व्यापार में धोखा न दो। जो धोखा देता हैं हम में से नही।

24. बाजार मे भाव बढ़ाने के लिए ( गल्ला आदि ) चीजों को रोककर ( जखीरा कर के ) मत रखों। ऐसा करने वाला घोर यातना का अधिकारी है।

25. पैसे को गिन-गिनकर जमा न करो और न फिजूलखर्ची करो, मध्यम मार्ग को अपनाओं।

26. दूसरों के अपराध क्षमा कर दिया करो। दूसरों के ऐब का प्रचार न करो उसे छिपाओं, तुम्हारा रब तुम्हारे ऐबो पर परदा डाल दैगा। झूठ, चुगलखोरी, झूटे आरोप ( बोहतान ) से बचो। लोगो को बुरे नाम से न पुकारो।

Best Islamic Quotes 26-50

27. अश्लीलता और निर्लज्जता के करीब भी न जाओ, चाहे वह खुली हो या छिपी।

28. दिखावे का काम न करो। दान छिपाकर दो। उपकार करके एहसान मत जताओ।

29. रास्ते से कष्टदायक चीजों ( कॉटे, पत्थर आदि ) को हटा दिया करो।

30. धरती पर नर्म चाल चलो, गर्व और घमण्ड न करो। जब बोलो अच्छी बात बोलो अन्यथा चुप रहो। अपने वचन और प्रतिज्ञा को पूरा करो।

31. किसी बलवान को पछाड़ देना असल बहादुरी नही, बहादुरी यह है कि आदमी गुस्से पर काबू पाए।

32. मजबूर का पसीना सूखने से पहले उसकी मजदूरी अदा करो।

33. किसी सेवक से उसकी शक्ति से अधिक काम न लो, उस के आराम का ख्याल रखो। जो खुद खाओं उसे भी खिलाओं और जो खुद पहनो उसे भी पहनाओं। जानवरों पर दया करो, उनकी शक्ति से अधिक उनसे काम न लो।

34. किसी वस्तु का आवश्यकता से अधिक प्रयोग न करो। पानी का दुरूपयोग न करो, चाहे तुम नदी के किनारे ही क्यो न हो।

35. अपने शरीर, वस्त्र और घर को पाक-साफ रखों। जब सो कर उठो तो सबसे पहले अपने दोनो हाथों को धो लो। तुम्हे पता नही कि नींद में हाथ कहॉ-कहॉ गए हैं।

36. युद्ध मे औरतो, बच्चो, बीमारों और निहत्थो पर हाथ न उठाओं। फल वाले पेड़ो को न काटो। युद्ध के बन्दियों के साथ अच्छा व्यवहार करो, उन्हें यातनाएं न दो।

37. जो कोई बुराई को देखे, तो अपनी ताकत के मुताबिक उसे रोकने की कोशिश करे, यदि रोकने की क्षमता ना हो तो दिल से उस को बुरा समझो।

38. सारे कर्मो का आधार नीयत ( इरादा ) हैं। गलत इरादे के साथ किए गए अच्छे कर्मो का भी कोई फल अल्लाह के यहॉ नही मिलेगा।

39. अपने भाई की मदद करो, चाहे वह अत्याचारी हो या नृशंसित (अत्याचार को सहन करने वाला)। नृशंसित की मदद यह है कि अत्याचारी से उसे छुड़ाया जाए और अत्याचारी की मदद यह है कि उसे अत्याचार से रोका जाए।

40. जो शख्स बिना आज्ञा अपने भाई के पत्र को देखे वह आग को देखेगा।

41. किसी भाई की ज़रूरत पूरी करने वाला ऐसा है कि गोया उस ने तमाम उम्र खुदा की ख़िदमत में बिता दी।

42. अपने किसी भाई को मुश्किल में देख कर खुश मत हो, मुम्किन है अल्लाह उसे मुश्किल से निकाल कर तुम्हें मुश्किल में डाल दे।

43. अपने मुसलमान भाई से मिलते वक़्त तुम्हारा मुस्कुरा देना भी सदका है। अच्छी बात कहना और बुराई से रोकना और भटके हुए को राह दिखाना भी सदका है।

44. मुसलमान, मुसलमान का भाई है उस पर जुल्म न करे न उसे जलील करे न हकीर समझे।

45. हलाल चीज़ों में से जो चाहो खाओ और पहनों लेकिन उस में दो चीजें न हों (1) फुजूल खर्ची (2) घमंड

46. दुनिया की कोई चीज़ तुम्हारे पास न हो, लेकिन यह चार चीजें हों तो तुम्हें कोई नुक्सान नहीं (i) बात करने का तरीका (ii) अमानत की हिफाज़त करना (iii) अच्छी आदत (iv) हलाल गिजा (आहार)।

47. जहाँ तक हो सके हर एक से नेकी करो चाहे नेक हो या बुरा।

48. किसी इंसान के दिल में ईमान और ईर्ष्या इकट्ठे नहीं रह सकते।

49. पड़ोसी का हक चारों तरफ़ 40-40 घरों तक है।

50. जो ईश्वर (अल्लाह) और कयामत पर ईमान रखता है उसे कह दो कि पड़ोसी का आदर करे।

Best Islamic Quotes 51-75

51. शिर्क (अल्लाह के साथ साझेदारी) के बाद बदतर गुनाह अल्लाह के बन्दों को तकलीफ पहुँचाना है और ईमान के बाद अफ़ज़ल तरीन नेकी अल्लाह के बन्दों को राहत पहुँचाना है।

52. वह शख़्स जो बड़ों का आदर और छोटों पर दया नहीं करता, वह मेरी उम्मत में से नहीं है।

53. पेट से बढ़ कर कोई बुरा बरतन नहीं।

54. जो शख़्स इस बात से खुश हो कि लोग उस के लिए सम्मान के तौर पर खड़े हों वह अपना ठिकाना आग में समझे।

55. ईश्वर के नज़दीक दो कतरों (बून्द) से बढ़ कर कोई क़तरा पसन्द नहीं। पहला आँसू का क़तरा जो खुदा के डर से निकले, दूसरा खून का क़तरा जो खुदा की राह में गिरे।

56. बाज़ार से बच्चों के लिए जो चीज़ लाओ पहले लड़की को दो फिर लड़के को।

57. जो ज्ञान की राह पर चलता है, अल्लाह उस के लिए स्वर्ग का रास्ता आसान कर देता है।

58. ज्ञान हासिल करना हर मुसलमाल मर्द और औरत पर फर्ज है।

59. जिस ने ज्ञान का रास्ता अपनाया उस ने स्वर्ग का रास्ता अपनाया।

60. जिस ने ज्ञान हासिल करने में मृत्यु पाई गोया वह शहीद हुआ।

61. जिहालत (अज्ञानता) ग़रीबी की बदतरीन शक्ल है।

62. जन्म से मौत (कब्र) तक ज्ञान हासिल करो।

63. हमेशा सच्ची और हक़ बात कहो अगरचे कड़वी ही हो।

64. तीन काम ऐसे हैं जो इंसान की मौत के बाद भी जारी रहते हैं। (i) सदकाए जारिया (ii) वह ज्ञान जिस से लोग फ़ायदा उठाएँ (iii) नेक संतान जो उस के लिए दुआ करे।

65. बुलंद हिम्मती ईमान की निशानी है।

66. वह शख़्स बेदीन है जिस में ईमानदारी नहीं।

67. ईमान और कंजूसी एक जगह इकट्ठे नहीं हो सकते।

68. सब्र ईमान से ऐसे मिला हुआ है जैसे सिर से जिस्म मिला हुआ है और सब्र ईमान की रौशनी है।

69. सादगी ईमान की अलामत है।

70. हया और कम बोलना ईमान की शाखें हैं।

71. बेहतरीन लोग वह हैं जो अच्छे सदाचार के मालिक हैं।

72. अपनी मेहनत की कमाई से बेहतर खाना किसी शख़्स ने कभी नहीं खाया।

73. (बुरी और फ़िज़ूल बातों से) ख़ामोशी बहुत बड़ी हिकमत (समझदारी) है।

74. समता अख्तियार करने वाला किसी का मुहताज नहीं होता।

75.कर्म नियतों के साथ हैं। हर शख़्स को उसी का बदला मिलेगा जिस की उस ने नियत की है।

Best Islamic Quotes 76-100

76. कपटाचारी की तीन निशानियाँ हैं। (i) जब बोले तो झूठ बोले। (ii) वादा करे तो पूरा न करे। (iii) अमानत ले तो ख्यानत करे।

77. हर नशे वाली चीज़ हराम है।

78. मोमिन की मिसाल खेती के पौदों की है जिसे हवा कभी झुका देती है कभी सीधा कर देती है और मुनाफ़िक की मिसाल सुनूबर के दरख्त की है जो खड़ा रहता है यहाँ तक कि एक ही दफ़ा उखड़ जाता है।

79. अल्लाह तआला ने हर बीमारी की शिफ़ा भी पैदा की है।

80. दुनिया में इस तरह रहो गोया प्रदेसी हो या राह चलने वाले।

81. वह ज़लील हुआ जिस ने माँ बाप को बुढ़ापे में पाया और उन की सेवा कर के स्वर्ग न हासिल की।

82. तुम में से बेहतर वह है जो कुरआन सीखे और दूसरों को सिखाए।

83. मय्यित (शव) के पीछे तीन चीजें चलती हैं, दो लौट आती हैं और एक रह जाती है। उस के पीछे उस के घर वाले, उस का माल और उस के कर्म चलते हैं। घर वाले और माल लौट आते हैं मगर कर्म साथ रह जाता है।

84. आदमी के झूटा होने के लिए यही काफी है कि वह सनी सुनाई बात बगैर जाँचे परखे आगे बयान कर दे।

85. दुनिया मोमिन का कैदखाना है और काफिर (नॉनमुस्लिम) के लिए जन्नत।

86. हर गुनाह की तौबा है मगर अशिष्टी की नहीं।

87. दुनिया की मुहब्बत हर ख़ता की जड़ है।

88. इंसाफ़ की बात ज़ालिम बादशाह के सामने कहना बहुत बड़ा जिहाद है।

89. रिश्वत लेने और देने वाला दोनो जहन्नमी हैं।

90. जिस शख्स ने हलाल तरीके से रोज़ी तलाश की और लोगों के सामने हाथ फैलाने से रुका अपने बच्चों की रोज़ी के लिए प्रयास किया और अपने पड़ोसी से अच्छी तरह से पेश आया तो अल्लाह तआला उस से इस शान से मुलाकात करेगा कि उस शख्स का चेहरा चौदहवीं के चाँद की तरह चमक रहा होगा।

91. नर्क में पहुँचाने वाला काम, झूठ बोलना है।

92. जो झूठ बोल बोल कर लोगों को हँसाए उस के लिए सख्त अज़ाब है।

93. अगर कोई बुरा काम देखे मगर मना न करे तो अल्लाह अज़ाब नाज़िल करेगा और सब को उस में घेर लेगा।

94. अल्लाह अत्याचारी को फुरसत देता है मगर जब पकड़ता है तो फिर नहीं छोड़ता।

95. जो मौत को याद रखे और उस की अच्छी तरह तयारी करे वह सब से ज़्यादा अकलमंद है।

96. ठोकर के बगैर कोई सब्र करने वाला नहीं बनता, तजुर्बे के बगैर कोई होशयार नहीं होता।

97. अकलमन्द वह है जो अपने अस्तित्व (नफ्स) की रक्षा करे और मौत के बाद के लिए अमल करे। निर्बल (कमज़ोर) वह है जो अस्तित्व का कहा माने और खुदा से उम्मीद रखे।

98. अल्लाह कहता है कि तीन आदमियों का कयामत के दिन मैं दुश्मन हूंगा। (i) वह जो मेरे नाम पर वादा करे और फिर तोड़ दे। (ii) जो किसी आज़ाद को बेच कर उस की कीमत खाए। (iii) जो किसी को मज़दूरी पर लगाए और काम होने पर उस को मज़दूरी न दे।

99. जो दया नहीं करता उस पर दया नहीं की जाएगी।

100. ताकतवर वह नहीं जो दूसरों को पिछाड़ दे, ताकतवर तो वह है जो गुस्से में अपने आप पर काबू रखे।

Best Islamic Quotes 101-125

101. मालदारी माल की कसरत से नहीं बल्कि मालदारी दिल की मालदारी है।

102. चुगली करने वाला जन्नत में दाखिल न होगा।

103. एक दूसरे की खुशामद न करो यह ऐसा है जैसे किसी को हलाक करना।

104. मोमिन को चाहिए अपने आप को ज़लील न करे जो काम . ताक़त से बाहर हो उस में हाथ न डाले।

105. तमाम बुरी आदतों में दो सब से बुरी हैं। (i) बहुत ज़्यादा कंजूसी, (ii) बहुत ज़्यादा कायरता।

106. जब कोई मुसलमान मेवादार दरख्त लगाता है और उस के मेवे पंछी इंसान और जानवर खाते हैं तो वह दरख्त कयामत तक के लिए उस शख्स के लिए जारी रहने वाला सदका बन जाता है।

107. बहुत ज़्यादा न हँसा करो, ज़्यादा हँसी से दिल सख्त हो जाता है।

108. हसद नेकियों को ऐसे खा जाता है जैसे आग लकड़ी को और सदका गुनाहों को ऐसे बुझा देता है जैसे पानी आग को।

109. जो आदमी खूनी रिश्तों को तोड़े वह जन्नत में दाखिल न होगा।

110. एक आदमी बात करे और वह राज़ की बात हो तो वह अमानत है।

111. ख़रीदने व बेचने में कसम खाने से बचे रहो। वह माल बिकवा देती है मगर फिर उसे मिटा देती है।

112. अल्लाह दो बातों को पसन्द करता है सब्र और समता।

113. दो आदतें मोमिन में नहीं होती कंजूसी और बुरे सदाचार।

114. मुसलमान को गाली देना पाप है और उस से जंग करना कुफ़।

115. जन्नत माँ के कदमों तले है।

116. जो धोका दे वह हम में से नहीं।

117. रोना दिल को रौशन करता है।

118. बाप जन्नत के बड़े दरवाज़ों में से है चाहो तो उसे खो दो चाहो तो सुरक्षित कर लो।

119. अल्लाह की प्रसन्नता बाप की प्रसन्नता में है और अल्लाह का गुस्सा बाप के गुस्से में है।

120. दुनिया दौलत है और दुनिया में अच्छी दौलत नेक बीवी है।

121. औरत से चार बातों कि वजह से विवाह किया जाता है। (i) माल के लिए। (ii) ख़ानदान के लिए। (iii) खूबसूरती के लिए। (iv) दीन के लिए। बेहतर है कि दीन के लिए करे।

122. मज़लूम की आह से डर कि उस के और अल्लाह के बीच कोई पर्दा (रुकावट) नहीं।

123. इंसाफ की एक घड़ी सालों की इबादत से बेहतर है।

124. शरीफ़ तबीयत के लोग औरत की इज़्ज़त करते हैं और कमीनों के सिवा औरत की तौहीन कोई नहीं करता।

125. दुनिया आख़िरत की खेती है जो बोओगे वही काटोगे।

Best Islamic Quotes 126-141

126. जुबान से अच्छी बात के सिवा कुछ न कहो।

127. जो शख़्स अपना गुस्सा निकाल लेने की ताकत रखता हो और फिर सब्र कर जाए, उस के दिल को अल्लाह सुकून और ईमान से भर देता देता है।

128. झूठी गवाही इतना बड़ा गुनाह है कि शिर्क के करीब जा पहुँचता है।

129. बदतरीन शख़्स वह है जिस के डर से लोग उस की इज्जत करें।

130. खाना खिलाना और जाने अंजाने को सलाम करना बेहतरीन इस्लाम (का अमल) है।

131. सवार पैदल को, चलने वाला बैठे को और थोड़े लोग ज़्यादा लोगों को सलाम करें।

132. मोमिन की जुबान दिल के पीछे होती है। यानी वह सोच समझ कर बोलता है।

133. जो शख़्स दूसरे को नेक काम की सलाह देता है तो उसे उसी के बराबर सवाब मिलता है जितना नेकी करने वाले को और जो किसी को बुरे काम की सलाह देता है उसे उसी के बराबर गुनाह होता है जितना बुरा काम करने वाले को।

134. ग़ल्ले (अनाज) को रोक कर बेचने वाला मलऊन (धिक्कृत) है।

135. औरतों में सब से अच्छी वह है जिसे उस का पति देखे तो खुश हो जाए।

136. सब से बड़ी नेकी अपने दोस्तों और साथियों की इज्जत करना है।

137. अल्लाह के नज़दीक बेहतरीन दोस्त वह है जो अपने दोस्त का भला चाहने वाला हो।

138. नर्म मिज़ाज और नर्म आदत वाले शख़्स पर जहन्नुम (नर्क) की आग हराम है।

139. जब तुम्हे नेकी कर के खुशी और बुराई कर के पछतावा हो तो तुम मोमिन हो।

140. जिस चीज़ का मैं ने हुक्म दिया उस पर अमल करो, जिस चीज़ से मना किया उस से रुक जाओ, तुम से पहली उम्मतें अपने नबियों से विरोध की वजह से हलाक हो गई थीं।

141. अपने माता पिता के साथ अच्छा व्यवहार करो, तुम्हारी संतान तुम्हारे साथ अच्छा व्यवहार करेगी।

Courtesy © Ummat-e-Nabi.com

प्यारे नबी (सल्ल॰) ने औरत को मर्द के बराबर दर्जा दिया: वेनगताचिल्लम अडियार (अब्दुल्लाह अडियार)

वेनगताचिल्लम अडियार (अब्दुल्लाह अडियार) | जन्म: 16, मई 1938 ● वरिष्ठ तमिल लेखक; न्यूज़ एडीटर: दैनिक ‘मुरासोली’ ● तमिलनाडु के 3 मुख्यमंत्रियों के सहायक ● कलाइममानी अवार्ड (विग जेम ऑफ आर्ट्स) तमिलनाडु सरकार; पुरस्कृत 1982 ● 120 उपन्यासों, 13 पुस्तकों, 13 ड्रामों के लेखक ● संस्थापक, पत्रिका ‘नेरोत्तम’

‘‘औरत के अधिकारों से अनभिज्ञ अरब समाज में प्यारे नबी (सल्ल॰) ने औरत को मर्द के बराबर दर्जा दिया। औरत का जायदाद और सम्पत्ति में कोई हक़ न था, आप (सल्ल॰) ने विरासत में उसका हक़ नियत किया। औरत के हक़ और अधिकार बताने के लिए क़ुरआन में निर्देश उतारे गए।

माँ-बाप और अन्य रिश्तेदारों की जायदाद में औरतों को भी वारिस घोषित किया गया। आज सभ्यता का राग अलापने वाले कई देशों में औरत को न जायदाद का हक़ है न वोट देने का। इंग्लिस्तान में औरत को वोट का अधिकार 1928 ई॰ में पहली बार दिया गया। भारतीय समाज में औरत को जायदाद का हक़ पिछले दिनों में हासिल हुआ।

लेकिन हम देखते हैं कि आज से चौदह सौ वर्ष पूर्व ही ये सारे हक़ और अधिकार नबी (सल्ल॰) ने औरतों को प्रदान किए। कितने बड़े उपकारकर्ता हैं आप। आप (सल्ल॰) की शिक्षाओं में औरतों के हक़ पर काफ़ी ज़ोर दिया गया है। आप (सल्ल॰) ने ताकीद की कि लोग कर्तव्य से ग़ाफ़िल न हों और न्यायसंगत रूप से औरतों के हक़ अदा करते रहें। आप (सल्ल॰) ने यह भी नसीहत की है कि औरत को मारा-पीटा न जाए।

औरत के साथ कैसा बर्ताव किया जाए, इस संबंध में नबी (सल्ल॰) की बातों का अवलोकन कीजिए:

1. अपनी पत्नी को मारने वाला अच्छे आचरण का नहीं है। 2. तुममें से सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति वह है जो अपनी पत्नी से अच्छा सुलूक करे। 3. औरतों के साथ अच्छे तरीक़े से पेश आने का ख़ुदा हुक्म देता है, क्योंकि वे तुम्हारी माँ, बहन और बेटियाँ हैं। 4. माँ के क़दमों के नीचे जन्नत है। 5. कोई मुसलमान अपनी पत्नी से नफ़रत न करे। अगर उसकी कोई एक आदत बुरी है तो उसकी दूसरी अच्छी आदत को देखकर मर्द को ख़ुश होना चाहिए। 6. अपनी पत्नी के साथ दासी जैसा व्यवहार न करो। उसको मारो भी मत। 7. जब तुम खाओ तो अपनी पत्नी को भी खिलाओ। 8. पत्नी को ताने मत दो। चेहरे पर न मारो। उसका दिल न दुखाओ। उसको छोड़कर न चले जाओ। 9. पत्नी अपने पति के स्थान पर समस्त अधिकारों की मालिक है। 10. अपनी पत्नियों के साथ जो अच्छी तरह बर्ताव करेंगे, वही तुम में सबसे बेहतर हैं।

मर्द को किसी भी समय अपनी काम-तृष्णा की ज़रूरत पेश आ सकती है। इसलिए कि उसे क़ुदरत ने हर हाल में हमेशा सहवास के योग्य बनाया है जबकि औरत का मामला इससे भिन्न है। माहवारी के दिनों में, गर्भावस्था में (नौ-दस माह), प्रसव के बाद के कुछ माह औरत इस योग्य नहीं होती कि उसके साथ उसका पति संभोग कर सके।

सारे ही मर्दों से यह आशा सही न होगी कि वे बहुत ही संयम और नियंत्रण से काम लेंगे और जब तक उनकी पत्नियाँ इस योग्य नहीं हो जातीं कि वे उनके पास जाएँ, वे काम इच्छा को नियंत्रित रखेंगे। मर्द जायज़ तरीक़े से अपनी ज़रूरत पूरी कर सके, ज़रूरी है कि इसके लिए राहें खोली जाएँ और ऐसी तंगी न रखी जाए कि वह हराम रास्तों पर चलने पर विवश हो। पत्नी तो उसकी एक हो, आशना औरतों की कोई क़ैद न रहे। इससे समाज में जो गन्दगी फैलेगी और जिस तरह आचरण और चरित्रा ख़राब होंगे इसका अनुमान लगाना आपके लिए कुछ मुश्किल नहीं है।

व्यभिचार और बदकारी को हराम ठहराकर बहुस्त्रीवाद की क़ानूनी इजाज़त देने वाला बुद्धिसंगत दीन इस्लाम है। एक से अधिक शादियों की मर्यादित रूप में अनुमति देकर वास्तव में इस्लाम ने मर्द और औरत की शारीरिक संरचना, उनकी मानसिक स्थितियों और व्यावहारिक आवश्यकताओं का पूरा ध्यान रखा है और इस तरह हमारी दृष्टि में इस्लाम बिल्कुल एक वैज्ञानिक धर्म साबित होता है। यह एक हक़ीक़त है, जिस पर मेरा दृढ़ और अटल विश्वास है।

इतिहास में हमें कोई ऐसी घटना नहीं मिलती कि अगर किसी ने इस्लाम क़बूल करने से इन्कार किया तो उसे केवल इस्लाम क़बूल न करने के जुर्म में क़त्ल कर दिया गया हो, लेकिन कैथोलिक और प्रोटेस्टेंट के बीच संघर्ष में धर्म की बुनियाद पर बड़े पैमाने पर ख़ून-ख़राबा हुआ। दूर क्यों जाइए, तमिलनाउु के इतिहास ही को देखिए, मदुरै में ज्ञान समुन्द्र के काल में आठ हज़ार समनर मत के अनुयायियों को सूली दी गई, यह हमारा इतिहास है।

अरब में प्यारे नबी (सल्ल॰) शासक थे तो वहाँ यहूदी भी आबाद थे और ईसाई भी, लेकिन आप (सल्ल॰) ने उन पर कोई ज़्यादती नहीं की।

हिन्दुस्तान में मुस्लिम शासकों के ज़माने में हिन्दू धर्म को अपनाने और उस पर चलने की पूर्ण अनुमति थी। इतिहास गवाह है कि इन शासकों ने मन्दिरों की रक्षा और उनकी देखभाल की है।

मुस्लिम फ़ौजकशी अगर इस्लाम को फैलाने के लिए होती तो दिल्ली के मुस्लिम सुल्तान के ख़िलाफ़ मुसलमान बाबर हरगिज़ फ़ौजकशी न करता। मुल्कगीरी उस समय की सर्वमान्य राजनीति थी। मुल्कगीरी का कोई संबंध धर्म के प्रचार से नहीं होता। बहुत सारे मुस्लिम उलमा और सूफ़ी इस्लाम के प्रचार के लिए हिन्दुस्तान आए हैं और उन्होंने अपने तौर पर इस्लाम के प्रचार का काम यहाँ अंजाम दिया, उसका मुस्लिम शासकों से कोई संबंध न था, इसके सबूत में नागोर में दफ़्न हज़रत शाहुल हमीद, अजमेर के शाह मुईनुद्दीन चिश्ती वग़ैरह को पेश किया जा सकता है।

इस्लाम अपने उसूलों और अपनी नैतिक शिक्षाओं की दृष्टि से अपने अन्दर बड़ी कशिश रखता है, यही वजह है कि इन्सानों के दिल उसकी तरफ़ स्वतः खिंचे चले आते हैं। फिर ऐसे दीन को अपने प्रचार के लिए तलवार उठाने की आवश्यकता ही कहाँ शेष रहती है?

श्री वेनगाताचिल्लम अडियार ने बाद में (6 जून 1987 को) इस्लाम धर्म स्वीकार कर लिया था। और ‘अब्दुल्लाह अडियार’ नाम रख लिया था।

श्री अडियार से प्रभावित होकर जिन लोगों ने इस्लाम धर्म स्वीकार किया उनमें उल्लेखनीय विभूतियाँ हैं : 1) श्री कोडिक्कल चेलप्पा, भूतपूर्व ज़िला सचिव, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया (अब ‘कोडिक्कल शेख़ अब्दुल्लाह’) 2) वीरभद्रनम, डॉ॰ अम्बेडकर के सहपाठी (अब ‘मुहम्मद बिलाल’) 3) स्वामी आनन्द भिक्खू—बौद्ध भिक्षु (अब ‘मुजीबुल्लाह’) श्री अब्दुल्लाह अडियार के पिता वन्कटचिल्लम और उनके दो बेटों ने भी इस्लाम स्वीकार कर लिया था।

- ‘इस्लाम माय फ़सिनेशन’ एम॰एम॰आई॰ पब्लिकेशंस, नई दिल्ली, 2007

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अपनी जानों पर जुल्म ना करो: कुरआन

अपनी जानों पर ज़ुल्म न करो:

अल्लाह ताला ज़ुल्म से बचने के बारे में इरशाद फरमाता है:

और अपने आप को क़त्ल न करो। और जो शख्स जोरो ज़ुल्म से नाहक़ ऐसा करेगा (ख़ुदकुशी करेगा) तो (याद रहे कि) हम बहुत जल्द उसको जहन्नुम की आग में झोंक देंगे यह ख़ुदा के लिये आसान है।

सूरह निसा 4:29-30

और अल्लाह की राह में ख़र्च करो और अपने हाथ जान हलाकत मे न डालो और नेकी करो बेशक अल्लाह नेकी करने वालों को दोस्त रखता है।

सूरह बकराह 2:195

अल्लाह ने ज़ुल्म को हराम कर दिया:

(ऐ रसूल) तुम साफ कह दो कि हमारे परवरदिगार ने तो तमाम बदकारियों को ख्वाह (चाहे) ज़ाहिरी हो या बातिनी और गुनाह और नाहक़ ज्यादती करने को हराम किया है।

सूरह अल-अराफ 7:33

रसूलुल्लाह (ﷺ) हदीसे कुदसी बयान करते हुए फर्माते हैं के अल्लाह तआला फर्माता है :

“ऐ मेरे बन्दो! मैंने अपने ऊपर जुल्म को हराम कर दिया है और उस को तुम्हारे दर्मियान भी हराम कर दिया है, लिहाजा तुम एक दूसरे पर जुल्म मत किया करो।”

📕 मुस्लिम: ६५७२


तौबा करने वालो को अल्लाह मुआफ करता है:

(आदम और हव्वा) दोनों अर्ज क़रने लगे, ऐ हमारे पालने वाले हमने अपने ऊपर ज़ुल्म किया है, और अगर तू हमें माफ न फरमाएगा और हम पर रहम न करेगा तो हम बिल्कुल घाटे में ही रहेगें।

सूरह अल-अराफ 7:23

अल्लाह हर ज़ुल्म से पाक है:

अल्लाह तो हरगिज़ बंदो पर कुछ भी ज़ुल्म नहीं करता, मगर लोग खुद अपने ऊपर ज़ुल्म किया करते हैं।

सूरह यूनुस 10:44

शिर्क भी एक ज़ुल्म है:

"लुकमान (अ.स.) ने अपने बेटे को हिदायत करते हुए कहा के बेटा अल्लाह के साथ किसी को शरीक ना करना, शिर्क तो बड़ा ज़ुल्म अज़ीम है।"

सूरह लुकमान 31:13

शिर्क के ज़ुल्म से जो बच गया उसके लिए अमन है:

जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और अपने ईमान को ज़ुल्म (शिर्क) से आलूदा नहीं किया उन्हीं लोगों के लिए अमन (व इतमिनान) है और यही लोग हिदायत याफ़ता हैं।

सूरह अल-अनआम 6:82

अल्लाह की रहमत से मायूस न हो:

ऐ नबी कह दो! के ऐ मेरे बंदो जिन्होनें अपनी जानो पर ज़ुल्म (ज़ायदती) की है, अल्लाह की रहमत से मायूस न हो जाओ, यकीनन अल्लाह सारे गुनाह माफ़ कर देता है, वो तो गफूर अर-रहीम है।

सूरह अज़-ज़ुमर 39:53

अल्लाह मुआफ करने पर क़ादिर है:

और (रसूल) जब उन (नाफरमान) लोगों ने (नाफ़रमानी करके) अपनी जानों पर जुल्म किया था, अगर तुम्हारे पास चले आते और अल्लाह से माफ़ी मॉगते और रसूल (तुम) भी उनकी मग़फ़िरत चाहते तो बेशक वह लोग अल्लाह को बड़ा तौबा क़ुबूल करने वाला मेहरबान पाते।

सूरह निसा 4:64

सुभान अल्लाह ! ۞ अल्लाह ताला हमे कहने सुनने से ज्यादा अमल की तौफ़ीक़ अता फरमाए। ۞ हमे हर तरह के ज़ुल्म बचाये।

۞ जबतक हमे ज़िंदा रखे इस्लाम और इमां पर जिन्दा रखे। ۞ खात्मा हमारा ईमान पर हो।

वा आखीरु दा-वाना अल्हम्दुलिल्लाही रब्बिल आलमीन। अमीन।

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ज़ुल्म के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाना: हदीस

Hadees of the Day

ज़ुल्म के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाना: हदीस

अबु बक्र सिद्दीक (रजी) से रिवायत है की, रसुलल्लाह (ﷺ) ने फरमाया:

"अगर लोग जालीम को जुल्म करते हुए देखे और उसे न रोके तो करीब है की अल्लाह तआला उन सबको अजाब मे मुब्तला कर देगा।"

📕 रियाद अस-सलीहिन, हदीस, 197

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मुसाफिर को पानी न देने का अंजाम

Hadees of the Day

मुसाफिर को पानी न देने का अंजाम

अबू हुरैरा (रज़ि) से रिवायत है की, रसूलअल्लाह (ﷺ) ने फरमाया -

3 तरह के लोग वो होंगे जिनकी तरफ कयामत के दिन अल्लाह तआला नज़र (नज़र-ए-रहमत) भी नहीं उठाएगा और ना उन्हें पाक करेगा, बल्कि उनके लिए दर्दनाक अज़ाब होगा।

एक वो शख़्स जिसके पास रास्ते में ज़रूरत से ज़्यादा पानी हो और उसने किसी मुसाफ़िर को उसके इस्तमाल से रोक दिया।

दूसरा वो शख्स जो किसी हाकीम से बैत सिर्फ दुनिया के लिए करे, कि अगर वो हाकीम उसे कुछ दे तो वो राजी रहे वरना खफा हो जाए।

तीसरा वो शख्स जो अपना (बेचने का तिजारती) सामान असर के बाद लेकर खड़ा हुआ और कहने लगा कि उस अल्लाह की कसम जिसके सिवा कोई सच्चा माबूद नहीं, मुझे इस सामान की कीमत इतनी मिल रही थी उस पर एक शख्श ने उसे सही समझा (और उस सामान को खरीद लिया) (यानी झूठ को इख्तियार करके तिजारत करनेवाला)।

📕 सहीह बुखारी, हदीस 2358

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झूठे बादशाह का अंजाम: हदीस

Hadees of the Day

झूठे बादशाह का अंजाम: हदीस

अल्लाह के रसूल (ﷺ) ने फ़रमाया:

"अल्लाह तआला रोज़े क़यामत 3 तरह के लोगो से न कलाम करेगा और न ही उनकी तरफ नज़रे रेहमत से देखेगा, और उनको दर्दनाक अजाब में मुब्तेला करेगा, और वो 3 ये लोग होंगे:

"बुढा जानी, झूठा बादशाह और मुतक्कबिर फ़क़ीर।"

📕 सहीह मुस्लिम, हदीस 107

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झूठ बोलना कब और कहाँ जायज़ है ?

झूठ बोलना कैसा है ?

झूठ बहुत बड़ा गुनाह है, झूठे इंसान पर अल्लाह तालाह की लानत होती है। अल्लाह ताला कुराने करीम में फरमाता है “बेशक झूठ बोलने वाले पर अल्लाह की लानत है।३:६१

लेकिन आज हम आप को यहाँ पर झूठ के बारे में ऐसी बात बताने जा रहे हैं, जो शायद आप न जानते हों। झूठ बोलने के लिए इस्लाम में सख्ती से मना किया गया है, लेकिन कहा जाता है कि तीन मौके पर झूठ बोलना जायज़ है।

अगर इंसान इन तीन मौके पर झूठ बोलता है तो उसे गुनाह नहीं मिलता है।

झूठ बोलना कब और कहाँ जायज़ है ?

१. बातिल के खिलाफ जंग में :

उन में सबसे पहला नंबर है कि जंग के मौके पर झूठ बोला जा सकता है।

कहा जाता है कि अगर कोई जंग के मैदान में है और अपने दुश्मनों को डराने के लिए झूठ बोलता है कि, हमारी एक बड़ी फौज हमारे पीछे आ रही है तो इस तरह का झूठ बोलना जायज है क्योंकि इस झूठ से बातील दुश्मन से जंग जीतना मकसूद है।

इसी लिए जंग के दौरान बोले गए झूठ को जायज़ कहा गया है। इसी तरह बातील दुश्मन को उलझाने के लिए भी झूठ बोलना जायज़ है।

२. रिश्तेदारों के बीच सुलह कराने में :

दूसरे नंबर पर आता है कि रिश्तेदारों के बीच सुलह कराने के लिए झूठ बोलना जायज़ है।

अगर किसी के रिश्तेदार ने आपस में लड़ाई कर ली हो और झूठ बोलकर दोनों रिशतेदारों के बीच सुलह हो जाती है तो ऐसे मौके पर झूठ बोलना जायज़ है,इस झूठ से गुनाह नहीं मिलेगा।

३. शौहर और बीवी का एक दूसरे को मनाने में :

तीसरे नंबर पर आता है कि शौहर और बीवी का आपस में झूठ बोलना जायज़ है, शौहर और बीवी के झूठ से मक़सूद ये है कि आपस में मुहब्बत उलफ़त पैदा हो। तो इसे झूठ नहीं कहा जाएगा।

मिसाल के तौर पर शौहर अपनी बीवी से कहता है: "तुम तो मेरे लिए बहुत क़ीमती हो।"

या फिर कहता हो "मेरे लिए तो तुझसे ज़्यादा कोई और प्यारा नहीं है।"

या फिर ये कहे "मेरे लिए तो तुम ही सब औरतों से ज़्यादा ख़ूबसूरत हो",

इस तरह के अलफ़ाज़ कहे। इस से वो झूठे मुराद नहीं है जिस से हुक़ूक़ मारने का बाइस बनता हो या फिर वाजिबात-ओ-फ़राइज़ से फ़रार होने का बाइस बनता हो।

इस सिलिसले में एक हदीस है जो हज़रत अस्मा बिंत यज़ीद रज़ी अल्लाहु तआला अनहा से रिवायत है, वह बयान करती हैं अल्लाह के रसूल सल्लाहू अलैहि वसल्लम ने इरशाद ने फ़रमाया:

"तीन जगहों के इलावा कहीं झूट बोलना हलाल नहीं। शौहर का अपनी बीवी को राज़ी करने के लिए बात करे, और जंग में झूठ और लोगों में सुलह कराने के लिए झूठ बोलना।"

📕 तिरमिज़ी हदीस नंबर (1939) 📕 सुनन अबू दाउद हदीस नंबर (4921 )

۞ अल्लाह से दुआ है के , हमे दिन की सही समझ अता फरमाए। ۞ हमे हुकूक अल्लाह और हुकूक अल ईबाद को इखलास के साथ अमल की तौफ़ीक़ अता फरमाए।

۞ जब तक हमे जिन्दा रखे, इस्लाम और इमांन पर रखे। ۞ खात्मा हमारा ईमान पर हो।

वा आखीरु दा-वाना अलहम्दुलिल्लाही रब्बिल आलमीन। आमीन

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Safar ki Dua | सफर की दुआ | तरीका और सावधानियाँ

सफ़र का मतलब क्या है?

सफ़र (سفر) एक अरबी शब्द है जिसका मतलब यात्रा करना, यात्रा पर जाना या परिवहन से है। यह चाँद के कैलेंडर (lunar calendar) का दूसरा इस्लामी महीना भी है और वह महीना है जब मुसलमान भोजन इकट्ठा करने के लिए अपने घर खाली कर देते थे।

हदीस और पैगंबर (ﷺ) की सुन्नत के हिसाब से, कई दुआएं हैं जिन्हें कोई भी सफर/यात्रा पर जाने के लिए पढ़ सकता है और हम इस एक पॉट में उन सभी को शामिल करेंगे। इनका इस्तेमाल सफर के किसी भी तरीके के लिए किया जा सकता है चाहे वह हवाई जहाज हो, कार हो या नाव से हो, या मोटर साईकल हो ।


सफर की दुआ

Safar ki Dua in Hindi

سُبْحَانَ الَّذِي سَخَّرَ لَنَا هَـٰذَا وَمَا كُنَّا لَهُ مُقْرِنِينَ وَإِنَّا إِلَىٰ رَبِّنَا لَمُنقَلِبُونَ

Transliteration: Bismiallahi wa alhamdu liallahi. Subhanaalladhi sakh-khara lana hadha wa ma kunna lahu muqrinin. Wa inna ila Rabbi-na la munqalibun.

तर्जुमा: पाक है वह ज़ात जिसने इस सवारी को हमारे क़ाबू में कर दिया है, हालांकि हम इसे अपने क़ाबू में नहीं कर सकते थे। हम अपने रब की ओर लौट कर जाने वाले हैं।


मंजिल पर पहुंचने पर यह दुआ करें

اللَّهُمَّ رَبَّ السَّمَاوَاتِ السَّبْعِ وَمَا أَظْلَلْنَ وَرَبَّ الَأَرَضِينَ السَّبْعِ وَمَا أَقْلَلْنَ وَرَبَّ الشَّيَاطِينَ وَمَا أَضْلَلْنَ وَرَبَّ الرِّيَاحِ وَمَا ذَرَيْنَ فَإِنَّا نَسْأَلُكَ خَيْرَ هَذِهِ الْقَرْيَةِ وَخَيْرَ أَهْلَهَا وَنَعُوذُ بِكَ مِنْ شَرِّهَا وَشَرِّ أَهْلِهَا وَشَرِّ مَا فِيهَا

Transliteration: Allhum rab alsamawat alsbʿ wama aẓlun wa-rab alarḍyn alsbʿ wama aqlun warab alshayaṭyn wama aḍlun warab alryaḥ wama duhryn finna nasalak khayr hudh alqarya wkhyr ahlha wanʿwdh baka mn shrha washr ahlha washr ma fyha.

तर्जुमा : "ऐ अल्लाह! सातों आसमानों और जिन चीज़ों पर उनका साया है, के रब, और सातों ज़मीनों और जिन चीज़ों को उन्होन ने उठाया हुआ, के रब, और सातों ज़मीनों और जिन चीज़ों पर उनका साया है, के रब, और हवाओं और जिन चीज़ों को ये उड़ाएं फिरती हैं, के रब मैं तुझ से इस बस्ती की भलाई, इस में रहने वालों की भलाई और जो इस में है उसकी भलाई का सवाल करता हूं, और मैं इसके शरर और इसके रहने वालों के शरर और जो इस में है उसके शरर से तेरी पनाह में आता हूँ।


एक और दुआ:

أعوذ بكلمات الله التامات من شر ما خلق

Transliteration: A’udhu bikalimat-illahit-tammati min sharri ma khalaqa

तर्जुमा : मैं अल्लाह तआला के कामिल कलीमात के साथ उसकी मखलूक के शर से, पनाह में आता हूं।


सफर में साथी की अहमियत :

अल्लाह के रसूल (ﷺ) ने कहा, "अगर लोगों को यह पता होता कि मैं अकेले सफर करने के खतरों के बारे में जानता हूं, तो कोई भी सवार रात में अकेले सफर नहीं करेगा।"

एक और रिवायत में, अल्लाह के रसूल (ﷺ) ने कहा, "एक सवार शैतान है (साथ में) और दो सवार दो शैतान हैं। तीन सवार एक गिरोह बनाते हैं। 1

📕 रियाज़स सालिहिन अरबी/अंग्रेजी पुस्तक संदर्भ: पुस्तक 8, हदीस 959

रसूलल्लाह (ﷺ) के समय में यह ज्यादा लागू और अच्छी सलाह थी, क्योंकि रात में सफर करना कहीं ज्यादा जोखिम भरा था, खासकर अगर अकेले जाना हो। आज रात में सफर करना ज्यादा मेहफ़ूज़ है लेकिन आप उतने सतर्क नहीं होंगे जितने पहली बार जागने पर होंगे।

लिहाजा रात के वक्त अगर सफर करना हो तो साथीयो के साथ या गिरोह में सफर करे, ये ज्यादा बेहतर होगा।


सफर में जब ऊंचाई पर पहुंचो (हवाई जहाज पर जाओ )

इब्न उमर (रजी.) ने बताया: जब भी रसूलल्लाह (ﷺ) और आके साथी ऊंचाई पर चढ़ते थे, तो वे नारा लगते थे: "अल्लाहु अकबर (अल्लाह सबसे महान है)," और जब वे नीचे चढ़ते थे, तो वे घोषणा करते थे: "सुब्हान अल्लाह (अल्लाह पाक है हर ऐब से)।"

📕 अबू दाऊद, रियाज़स सालिहिन, अरबी/अंग्रेजी पुस्तक संदर्भ: पुस्तक 8, हदीस 976


छुट्टियों के दौरान मुख़्तसर दुआ :

इब्न अब्बास (रजी.) से रिवायत है: रसूलल्लाह (ﷺ) एक बार उन्नीस दिनों तक रुके थे और मुख़्तसर दुआएं कीं। इसलिए जब हम उन्नीस दिनों के लिए सफर करते थे (और रुकते थे), तो हम दुआ को छोटा कर देते थे, लेकिन जब हम लम्बे अर्से के लिए सफर करते थे (और रुकते थे) तो हम पूरी दुआ करते थे।

📕 सहिह अल-बुखारी 1080, इन-बुक संदर्भ: पुस्तक 18, हदीस 1


औरत का तन्हा सफर करना कैसा?

रसूलल्लाह (ﷺ) ने फरमाया के - “जो औरत अल्लाह और कयामत के दिन पर ईमान रखती है उसके लिए ये हलाल नहीं के वो अपने बाप, भाई, शोहर, बेटे, या किसी मेहरम के बगैर 3 दिन या इस से ज़ियादा का सफ़र करे।”

📕 सहीह मुस्लिम, हदीस संख्या 3270, पेज#901

वजाहत: उलमाए कराम ने इस की हद किलोमीटर में 92 किमी बयान फरमाई है। वल्लाहु आलम!

۞ अल्लाह ताला हमे कहने सुनने से ज्यादा अमल की तौफीक अता फरमाए, ۞ हमारे सफर को कामियाब फरमाए , ۞ सफर की तमाम सख्तियों और मुसीबतों से हमारे जानो माल और इज़्ज़तो इमांन की हिफाज़त फरमाए।

۞ जब तक हमे जिन्दा रखे, इस्लाम और इमांन पर रखे। ۞ खात्मा हमारा ईमान पर हो।

वा आखीरु दा-वाना अलहम्दुलिल्लाही रब्बिल आलमीन। आमीन

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बनी इस्राईल पर अल्लाह का अज़ाब और उम्मते मुस्लिमा के लिए इबरत

आज फलस्तीन और इस्राईल के दरमियान जो हालात है, जिस हालात से उम्मते मुस्लिमा आज गुजर रही है, आखिर क्या वजह है के ज़ालिम हुकुमराह हमपर मुसल्लत है ? आईये इसके ताल्लुक से हमसे पिछली उम्मत यानी बनी इस्राईल की हलाकत की मिसाल पर गौर करते है।

बनी इस्राईल पर अल्लाह के अज़ाब का पहला वादा:

बनी इस्राईल हमसे पहले अल्लाह की चुनिंदा कौम थी, अल्लाह ने इनमे अम्बिया (अलेही सलाम) भेजे, और इन्हें दीगर कौमो की इमामत का जिम्मा दिया, लेकिन इस कौम ने गुनाह और मासियत किये, रब को नाराज़ किया, शिर्क किया, अल्लाह के दिन में बिद्दते इजाद किये और सबसे बड़ा जुर्म ये कर बैठे के अल्लाह के भेजे अम्बिया (अलैहि सलातो सलाम) के क़त्ल को भी अपनी जिंदगी का शाआर बना बैठे।

फिर अल्लाह का अजाब इनपर यकीनी हुआ जिसके ताल्लुक से अल्लाह ने कुरान में फ़रमाया:

और जब पहले वादे का वक्त पूरा हो गया तो हमने ऐसे लड़ाकू बन्दे तुमपर हावी कर दिए जो बोहोत मजबूत थे लडाई में और ऐसे तुमसे लढे के तुम्हारे घरो में जा घुसे”

अल-कुरान १७:०५

इस आयत में पहले वादे से मुराद मुफस्सरिन लिखते है के यह “बूख्तनसर” बादशाह का ज़माना था, जब यहूदियों को अल्लाह ने दुनिया की इमामत के लिए चुना तो इन्होने अल्लाह की नाराज़गी वाले काम किये और दानियल (अलेही सलाम) जैसे नबी को तकलीफ पोह्चायी।

तो अल्लाह रब्बुल इज्ज़त ने अपने पहले वादे को इनके खिलाफ पूरा किया और बख्तनसर के जरये यहू*दियों को ज़लील कर इनको अपने मुल्क फलेस्तीन से निकालकर वो अपने साथ गुलाम बनाकर इराक ले गया।

दूसरा वादा:

बख्तनसर की कैद से कई सालो बाद ये आज़ाद होकर वापस आये लेकिन अल्लाह को पता था के ये लोग अपनी मासियत (हथधर्मी) से बाज़ नहीं आने वाले, तो अल्लाह ने इनपर दुबारा अपना गज़ब ढाया जिसके ताल्लुक से अल्लाह ताला ने कुरान में आगे फ़रमाया –

"और जब दूसरा वादा हमारा पूरा हुआ”

अल-कुरान १७:७

दुसरे वादे से मुराद जब यहू*दियों को अल्लाह ने बख्तनसर की क़ैद से आज़ादी दे दी, लेकिन फिर भी ये अपनी मासियत से ताईब न हुए और इन्होने वही सुलूक किया यानी अल्लाह के एक और नबी ईसा (अलैहि सलातो सलाम) के क़त्ल का मंसूबा किया।

अल्लाह ने उस मनसूबे में इनको नाकाम किया, ईसा (अलैहि सलाम) को दुनिया से उठा लिया और आपके जाने के ७० साल बाद अल्लाह ने यूनान के बादशाह “टाइटस” के हाथो बनी इस्राईल पर ऐसा कहर ढाया के इन्हें कम-से-कम १९०० साल के लिए फलेस्थिन की सरज़मीन से हकाल दिया।

टाइटस ने बनी इस्राईल पर इस शदीद तरह से हमला किया के ये कौम १९२४ तक कही बस न सकी, पूरी दुनिया में १९०० साल तक भटकते रहे, जिसको आज भी "The Jewish Diaspora” के नाम से जाना जाता है।

Arch of Titus Menorah
यहूदी लोगों के नहूम गोल्डमैन संग्रहालय में टाइटस के आर्क से राहत पैनल की प्रतिलिपि, यहूदी कैप्टा ("यहूदिया को गुलाम बनाया गया / जीत लिया गया") का जश्न मनाते हुए रोमन सैनिकों की विजयी परेड को दर्शाया गया है और घेराबंदी की लूट का प्रदर्शन करते हुए नए गुलाम बनाए गए यहूदियों का नेतृत्व किया गया है। Source: Wikipedia

यानी अल्लाह ने इन्हें पूरी दुनिया में जलील और रुसवा किया, ये कौम ज़िल्लत की जिंदगी जीती रही, के यूरोप के अंदर इनके अलग इलाके हुआ करते थे जिसे “Ghettos” कहा जाता, मतलब जानवरों के रखने की जगह यहूदी रखे जाते थे।

लेकिन इनका शर्र्र और फितना ऐसा ही है के – इस कौम ने कभी अल्लाह की नाफ़रमानी से तौबा नहीं की, तो अल्लाह ने इनको क़यामत तक हमारे लिए इबरत बना दिया और वादा कर के कुरान में फ़रमाया  –

और वो वक्त याद करो जबकि तुम्हारे रब ने इस चीज़ को तय कर दिया बनी इस्रायील के लिए के क़यामत तक मैं तुमपर जालीम और जाबिर हुकुमरानो को मुसल्लत करता रहूँगा”

अल कुरान ७:१६७

और अल्लाह की उस मार और फटकार का नतीजा हम हर सदी में देख ही रहे है के यहू*दियों को क्या मिला है?

हर सदी में ज़लील और रुसवा हुए, जानवरों के साथ रखे गए, पिछली सदी में हिटलर ने इन्हें लाखो की तादाद में अजीयत दे-देकर मारा। 🥺

और आज भी जिस तरह से ये लोग इंसानियत पर ज़ुल्मो सितम कर रहे है गोया के ये 'लो' तेजी से फड़क रही है और इंशाल्लाह ये अपने बुझने की और हमे ताईद कर रही है।

मुसलमानो के लिए इबरत

याद रहे के: किसी की भी हलाकत (नुकसान) हमारे लिए खुशियों का सबब नहीं है, बल्कि हमे चाहिए के इनकी हलाकत से इबरत हासिल करे, “अगला गिरा तो पिछले को चाहिए के वो संभल जाये”

वरना कही ऐसा न हो के अगर हमने भी अपने गुनाह-व-मासियत और अपने अमल के इस्लाह की गौरो फ़िक्र न की तो अल्लाह रब्बुल इज्ज़त के लिए कोई बईद (नामुमकिन) नहीं के वैसे ही फैसले अल्लाह हमारे हक में कर दे। (अल्लाह रहम करे हम पर)

और आज हम जिस हालत से गुजर रहे है जिसका नतीजा हमारे बुरे आमल है याद रखिये , - आज भाई भाई को क़त्ल कर रहा है , - मुसलमान मुल्क दुसरे मुसलमान मुल्क को क़त्ल कर रहे है , - मुसलमान आपस में एक दुसरे को गिरोहबंदी और फिर्काबंदी के नाम पर क़त्ल कर रहे है , - जमातो और तंजीमो के नाम पर एक दुसरे को क़त्ल किया जा रहा है,

और इस से ज्यादा अफ़सोस के साथ हम क्या कहे के "एक जमात में भी दो लोग आपस में तीसरे के खिलाफ चाले चल रहे है" इतने हम गिर चुके है। अल्लाह रहम करे।

और फिर जब अल्लाह का अजाब आता है तौ हम परेशान होते है के कौमे क्यों हमपर मुसल्लत हो रही है।

याद रहे “आज हमारी शिकस्त की सबसे अहम् वजह अल्लाह की नाफ़रमानी है” अल्लाह की नाजिल करदा हिदायत और रसूलल्लाह (सलाल्लाहो अलैही वसल्लम) की सुन्नत की मुखालिफत यही सबसे अहम् वजह है हमारी जिल्लत और रुसवाई की।

तो बहरहाल अगर हम चाहते है के अल्लाह हमपर रहम करे, उसका करम हमपर हो तो हमे चाहिए के अल्लाह और उसके रसूल (सलल्लाहो अलैही वसल्लम) की तालीमात पर हम जम जाये और अपने दोस्त-अहबाब और दुसरो को भी उसकी दावत दे।

इंशा अल्लाह-उल-अज़ीज़! - अल्लाह तआला हमे अपने रहमो करम का साया नसीब फरमाए। - हमे तमाम किस्म की गुमराहियो से बचाए। - किताबो-सुन्नत पर अमल की तौफीक दे। - जब तक हमे जिंदा रखे इस्लाम और ईमान पर जिन्दा रखे। - खात्मा हमारा ईमान पर हो। - वा आखिरू दावा’ना अलह्म्दुलिल्लाही रब्बिल आलमीन !!!

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इस्लाम में नारी का महत्व और सम्मान | Women's rights in Islam Hindi

इस्लाम में नारी का महत्व और सम्मान

Women's rights in Islam Hindi

अन्य धर्मो में नारी का स्थान:

यदि आप धर्मों का अध्ययन करें तो पाएंगे कि हर युग में महिलाओं के साथ सौतेला व्यवहार किया गया।

हर धर्म में महिलाओं का महत्व पुरुषों की तुलना में कम रहा। बल्कि उनको समाज में तुच्छ समझा गया, उन्हें प्रत्येक बुराइयों की जड़ बताया गया, उन्हें वासना की मशीन बना कर रखा गया। एक युग महिलाओं पर ऐसा ही बिता कि वह सारे अधिकार से वंचित रही।

लेकिन यह इस्लाम की भूमिका है कि उसने हव्वा की बेटी को सम्मान के योग्य समझा और उसको मर्द के समान अधिकार दिए गए।

क़ुरआन की सूरः बक़रः (2: 228) में कहा गया:

“महिलाओं के लिए भी सामान्य नियम के अनुसार वैसे ही अधिकार हैं जैसे मर्दों के अधिकार उन पर हैं।”

सूरः बक़रः 2: 228

इस्लाम में महिलाओं का स्थान:

इस्लाम में महिलाओं का बड़ा ऊंचा स्थान है। इस्लाम ने महिलाओं को अपने जीवन के हर भाग में महत्व प्रदान किया है। माँ के रूप में उसे सम्मान प्रदान किया है, पत्नी के रूप में उसे सम्मान प्रदान किया है, बेटी के रूप में उसे सम्मान प्रदान किया है, बहन के रूप में उसे सम्मान प्रदान किया है, विधवा के रूप में उसे सम्मान प्रदान किया है।

खाला के रूप में उसे सम्मान प्रदान किया है, तात्पर्य यह कि विभिन्न परिस्थितियों में उसे सम्मान प्रदान किया है जिन्हें बयान करने का यहाँ अवसर नहीं हम तो बस उपर्युक्त कुछ स्थितियों में इस्लाम में महिलाओं के सम्मान पर संक्षिप्त में प्रकाश डालेंगे।

माँ के रूप में सम्मानः

माँ होने पर उनके प्रति क़ुरआन ने यह चेतावनी दी कि “और हमने मनुष्य को उसके अपने माँ-बाप के मामले में ताकीद की है – उसकी माँ ने निढाल होकर उसे पेट में रखा और दो वर्ष उसके दूध छूटने में लगे – कि ”मेरे प्रति कृतज्ञ हो और अपने माँ-बाप के प्रति भी। अंततः मेरी ही ओर आना है॥14॥ ”

कुरआन ने यह भी कहा कि -

तुम्हारे रब ने फ़ैसला कर दिया है कि उसके सिवा किसी की बन्दगी न करो और माँ-बाप के साथ अच्छा व्यवहार करो यदि उनमें से कोई एक या दोनों ही तुम्हारे सामने बुढ़ापे को पहुँच जाएँ तो उन्हें ‘उँह’ तक न कहो और न उन्हें झिझको, बल्कि उनसे शिष्‍टापूर्वक बात करो॥23॥ और उनके आगे दयालुता से नम्रता की भुजाएँ बिछाए रखो और कहो, “मेरे रब! जिस प्रकार उन्होंने बालकाल में मुझे पाला है, तू भी उनपर दया कर।”॥24॥

सूरः बनीइस्राईल 23-25

» हदीस: माँ के साथ अच्छा व्यवहार करने का अन्तिम ईश्दुत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने भी आदेश दिया, एक व्यक्ति उनके पास आया और पूछा कि मेरे अच्छे व्यवहार का सब से ज्यादा अधिकारी कौन है? आप ने फरमायाः तुम्हारी माता, उसने पूछाः फिर कौन ? कहाः तुम्हारी माता. पूछाः फिर कौन ? कहाः तुम्हारी माता, पूछाः फिर कौन ? कहाः तुम्हारे पिता । मानो माता को पिता की तुलना में तीनगुना अधिकार प्राप्त है।

» हदीस: अन्तिम संदेष्टा मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फरमायाः "अल्लाह की आज्ञाकारी माता-पिता की आज्ञाकारी में है और अल्लाह की अवज्ञा माता पिता की अवज्ञा में है” - (तिर्मज़ी)

पत्नी के रूप में सम्मानः

पवित्र क़ुरआन में अल्लाह तआला ने फरमाया और उनके साथ भले तरीक़े से रहो-सहो। (निसा4 आयत 19) और मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फरमायाः "एक पति अपनी पत्नी को बुरा न समझे यदि उसे उसकी एक आदत अप्रिय होगी तो दूसरी प्रिय होगी।” - (मुस्लिम)

बेटी के रूप में सम्मानः

मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फरमायाः "जिसने दो बेटियों का पालन-पोषन किया यहां तक कि वह बालिग़ हो गई और उनका अच्छी जगह निकाह करवा दिया वह इन्सान महाप्रलय के दिन हमारे साथ होगा” - (मुस्लिम) आपने यह भी फरमायाः "जिसने बेटियों के प्रति किसी प्रकार का कष्ट उठाया और वह उनके साथ अच्छा व्यवहार करता रहा तो यह उसके लिए नरक से पर्दा बन जाएंगी” - (मुस्लिम)

बहन के रूप में सम्मानः

मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फरमायाः "जिस किसी के पास तीन बेटियाँ हों अथवा तीन बहनें हों उनके साथ अच्छा व्यवहार किया तो वह स्वर्ग में प्रवेश करेगा” - (अहमद)

विधवा के रूप में सम्मानः

इस्लाम ने विधवा की भावनाओं का बड़ा ख्याल किया बल्कि उनकी देख भाल और उन पर खर्च करने का बड़ा पुण्य बताया है। मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फरमायाः ”विधवाओं और निर्धनों की देख-रेख करने वाला ऐसा है मानो वह हमेशा दिन में रोज़ा रख रहा और रात में इबादत कर रहा है।” - (बुखारी)

खाला के रूप में सम्मानः

इस्लाम ने खाला के रूप में भी महिलाओं को सम्मनित करते हुए उसे माता का पद दिया। हज़रत बरा बिन आज़िब कहते हैं कि अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फरमायाः "खाला माता के समान है।” - (बुखारी)

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